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कई मामलों का उदाहरण भी दिया। ‘‘जो समीकरण श्री नेहरू कांग्रेस के संबंध में बता रहे हैं वह सत्य नहीं है। ’’
यह देखते हुए कि चुनावों की खातिर कांग्रेसी लोगों ने कांग्रेस अध्यक्ष श्री टंडन से सिंहासन छीनकर उनके स्थान पर श्री नेहरू का चयन कर लिया। डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि, ‘‘श्री नेहरू सपनों की दुनिया में रह रहे हैं। इस बात को वह जितना जल्दी समझ लें उतना ही अच्छा होगा।’’
‘‘श्री नेहरू बहुत भोले व्यक्ति हैं इनको नहीं समझ सकते हैं। मुझे आशंका है कि चुनावों के खत्म हो जाने पर उनकी स्थिति क्या होगी।’’ डॉ. अम्बेडकर ने उद्घोष किया कि, ‘‘चूंकि मैं यथार्थवादी हूं, मैं श्री नेहरू से बेहतर यह जानता हूं कि अन्य कांग्रेसी नेता उनके बारे में क्या सोचते है।’’
उनका विचार था कि जब भारतीय गणतंत्र के राष्ट्रपति के चुनाव का समय आ जाएगा तब या तो प्रधानमंत्री को हार स्वीकार करनी पड़ेगी अथवा कांग्रेस के बाहर से अपने ही आदमी को चुनना पड़ेगा। डॉ. अम्बेडकर ने सभा में कहा कि जब श्री रफी अहमद किदवई ने कांग्रेस छोड़ी, तब उन्होंने श्री किदवई से कहा था ‘‘नेहरू जैसे लोगों को अपने साथ ले लीजिए और मैं आपके साथ हूं।’’
मजबूत विपक्ष के होने के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि किसी भी पार्टी के पास असीमीत शक्ति नहीं होनी चाहिए और अगर ऐसी नौबत आ जाए तब लोगों का आलसी और उदासीन बने रहना बुरी बात है।
सोशलिस्ट पार्टी और अनुसूचित जाति फेडरेशन चुनाव लोकतांत्रिक समाजवाद के लिए, स्वतंत्रता के लिए और समानता के लिए लड़ रहे हैं।
उनका सोचना था कि भले ही वे एक सरकार न बना पाएं, लेकिन वे एक मजबूत विपक्ष जल्द बना सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि ‘‘संस्थाओं से काई फर्क नहीं पड़ता। विपक्ष की गुणवत्ता मायने रखती है।’’ उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अगर सोशलिस्ट पार्टी और फेडरेशन के द्वारा उतारे गए सभी प्रत्याशियों को नही ंतो कम से कम सर्वश्रेष्ठ प्रत्याशियों को जरू चुनें, ताकि विपक्ष अच्छी गुणवत्ता का हो। चूंकि श्री मेहता का स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसलिए उन्होंने सभा को संबोधित नहीं किया, लेकिन उनके स्थान पर श्री एम. हैरिस ने भाषण दिया। उन्होंने कहा कि लाभ प्राप्ति के इच्छुक दलों ने फेडरेशन के साथ समाजवादियों के गठबंधन की गलत व्याख्याएं देने की कोशिश की है।
इससे पहले कुर्ला से कोलाबा तक पड़ने वाले कई चुनाव क्षेत्रों में जुलूस निकाले गए जो अंत में शिवाजी पार्क में आकर मिल गए। दो प्रमुख जुलूस बायकुला ब्रिज और डाक्स क्षेत्रों से शुरू हुए।’’ ख्1,
1 द नेशनल स्टैंडर्ड, 26 नवंबर, 1951