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पर बहुत ध्यान दिया जाए। उन्होंने कांग्रेस के सांसदों द्वारा चुनावों के लिए अयोग्यता की शर्तों वाले उस प्रस्ताव के लिए, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनके विरुद्ध संसद में हंगामा खड़ा करने का भी हवाला दिया जिसे वह पारित करना चाहते थे। वह चाहते थे कि काला-बाजारी करने वालों तथा ठेकेदारों इत्यादि को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य कर दिया जाए। लेकिन कांग्रेसी सदस्यों के प्रबल विरोध के कारण उन्हें उस क्लॉज (शर्त) को निकालने के लिए बाध्य होना पड़ा। एक और लड़ाई जो उन्होंने लड़ी, लेकिन जिसमें वह अंततः हार गए वह राजनीतिक दलों द्वारा चुनावों के दौरान किए जाने वाले व्यय से संबंधित थी।

यह पूछते हुए कि, ‘‘क्या कांग्रेस का यह चरित्र और दृष्टिकोण प्रशासन को पारदर्शी बनाए रखने के लिए अनुकूल है? उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसी पार्टी जो प्रशासन की सफलता के प्रश्न पर गंभीर न हो, में किसी का विश्वास नहीं रह गया है।’’

लोगों की भलाई के प्रशासन का स्वच्छ होना बहुत आवश्यक है, क्यांकि कानून कैसे बनाया गया के बजाय लोगों की चिंता इस बात में होती है कि कानून को कैसे चलाया गया ?

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि उन्हें बहुत-सी शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिनमें आरोप है कि उनके जिलों के कांग्रेसी कार्यकर्ता न्यायिक अधिकारियों पर प्रभाव डाल रहे थे। भारत में एक मजबूत विपक्ष की आवश्यकता पर बल देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कांग्रेस से गुहार लगाई कि वह अन्य राजनीतिक दलों को विपक्षी दलों के रूप में कार्य करने दे, लोगों की राजनीतिक आवाज का दमन न करे। धनाढय वर्ग को उन्होंने सचेत किया कि वे कांग्रेस पार्टी के कोष में चंदा न जमा करें। कथित रूप से पूर्व कानून मंत्री ने श्री एस.के. पाटिल द्वारा उन पर लगाए गए उस आरोप का भी संदर्भ दिया जिसमें कहा गया था कि चूंकि उन्होंने मंत्रालय से इस्तीफा दिया है इसलिए वे कृतघ्न हैं। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता के बारे में श्री पाटिल कुछ हास्यास्पद विचार रखते हुए प्रतीत होते हैं और उन्होंने आयरलैंड के एक दार्शनिक की एक सूक्ति का उद्धरण दिया जो कुछ इस प्रकार था ‘‘अपना सम्मान बेचकर कोई पुरुष कृतज्ञ नहीं बन सकता। अपना सतीत्व बेचकर कोई स्त्री कृतज्ञ नहीं बन सकती और कोई राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता बेचकर कृतज्ञ नहीं बन सकता है।’’

डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि कृतज्ञता की अपनी सीमाएं होती हैं। वह भारत सरकार में गुलाम बनकर नहीं रहना चाहते थे। श्री पाटिल के इस दावे के जवाब में कि उनके ही प्रयत्नों से डॉ. अम्बेडकर को केंद्र सरकार में स्थान मिल पाया था, डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि यह उनके जीवन के महानतम आश्चर्यों में से एक था कि वह कैबिनेट में कैसे लिए गए थे, खासतौर पर तब जब कांग्रेस ने वस्तुतः संकल्प ले लिया था कि वह उन्हें कांस्टीटयूऐंट असेंबली के प्रवेश मार्ग में भी नहीं घुसने देगी। ख्1,

   द ख्1, टाइम्स ऑफ इंडिया, 27 नवंबर, 1951