133. 26.11.1951 लोगों की भलाई के लिए प्रशासन का स्वच्छ होना आवश्यक है - Page 455

434 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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26 नवम्बर, 1951 को मुंबई के सर कावसजी जहांगीर हाल में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और अनुसूचित जाति फेडरेशन की संयुक्त सभा हुई जिसमें डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने खचाखच भरी हुई सभा को संबोधित करते हुए भाषण दिया। सभा की अध्यक्षता श्री पुरुषोत्तम त्रिकमदास ने की।

भारत सरकार के पूर्व कानून मंत्री डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने सोमवार को आरोप लागया कि नेहरू की सरकार और कांग्रेस पार्टी लोगों को एक स्वच्छ और ईमानदार प्रशासन देने में नाकाम रही है।

कांग्रेस पर जनता को रोटी और कपड़ा न उपलब्ध कराने का आरोप सही ही लगाया गया है। लेकिन रोटी और कपड़े से भी जरूरी एक चीज थी जो मौजूदा सरकार लोगों को नहीं दे सकती है। और वह है भ्रष्टाचार, घूसखोरी, भाई-भतीजावाद तथा पक्षपात से मुक्त एक स्वच्छ प्रशासन।

उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मद्रास में हुई भ्रष्टाचार और घूसखोरी की तमाम घटनाओं को उद्धरित करते हुए डॉ. अम्बेडकर ने अपने आरोपों का समर्थन किया और कांग्रेस आलाकमान से प्रश्न किया कि कांग्रेसी विधायकों द्वारा उन राज्यों के मंत्रालयों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच-पड़ताल के लिए उन्होंने जांच समिति बैठाना क्यों उचित नहीं समझा।

उन्हें बहुत ताज्जुब है कि जिस कांग्रेस पार्टी ने देश पर शासन किया, वह अपनी प्रतिष्ठा, सम्मान और ईमानदारी को लेकर इतनी उदासीन है कि अपने खुद के सदस्यों द्वारा सरकार पर लगाए आरोपों की जांच के लिए भी जांच समिति नहीं बैठा रही है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि लोगों को रोटी और कपड़ा उपलब्ध करवाना कठिन है। लेकिन क्या जनता को एक स्वच्छ प्रशासन दे पाना भी मुश्किल है। यह मामला तो पूरी तरह सरकार के हाथ में है। अगर सरकार ने दृढ़ निश्चय कर ही लिया होता कि वह अपने प्रशासन को पारदर्शी और सुगम बनाएगी तो कोई चीज उसके आड़े नहीं आती। लेकिन कांग्रेस तो खुद इसके आड़े आ रही है, क्योंकि प्रशासन की पारदर्शिता में उसे आस्था ही नहीं है।

विशेष तौर पर वह कांग्रेस अध्यक्ष नेहरू के दिल्ली अधिवेशन में दिए उस बयान से आहत हैं जिसमें उन्होंने वस्तुतः देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को जायज ठहराया है। श्री नेहरू ने कहा था कि भारत में भ्रष्टाचार इतनी बड़ी बुराई नहीं है कि उस