135. 31.5.1952 देश का हित मेरे हृदय में सर्वोपरि है - Page 458

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देश का हित मेरे हृदय में सर्वोपरि है

‘‘अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने 1950 में लिए गए एक स्पष्ट निर्णय के तहत डॉ. भीमराव अम्बेडकर को स्वतंत्र भारत के संविधान का निर्माण करने में उनकी महती भूमिका के लिए एल.एल.डी. की उपाधि से विभूषित कर सम्मानित करने का निर्णय लिया है। जब डॉ. अम्बेडकर को यह समाचार अपने उस प्राणप्रिय संस्थान से प्राप्त हुआ जहां से वर्ष 1915 तथा वर्ष 1917 में उन्होंने क्रमशः एम.ए. तथा पीएच.डी की उपाधियां प्राप्त की थी, तब वे खुशी से फूले नहीं समाये। लेकिन भारत की नवनिर्मित सरकार के समक्ष कई समस्याएं व कुछ संवैधानिक समस्याएं थीं जिनका समाधान डॉ. अम्बेडकर की विशेषज्ञता के द्वारा किया जाना था। अपने इस दायित्व बोध के कारण डॉ. अम्बेडकर आमंत्रण स्वीकार नहीं कर सके। इसके अलावा उनका खराब स्वास्थ्य भी उनको नहीं जाने देता। उन्होंने बड़ी विनम्रता से यूनिवर्सिटी को सूचना दे दी कि वह समारोह में न आ सकेंगे। जनरल आसेनहावर उस समय कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष थे जिन्होंने बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपनी सेवाएं दी। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता उन्ही को करनी थी। यूनिवर्सिटी अनुपस्थिति में भी उपाधि देने को तैयार थी। लेकिन डॉ. अम्बेडकर ने यूनिवर्सिटी को बताया कि वह एक-दो साल के भीतर उपाधि स्वीकार करने के लिए व्यक्तिगत रूप से आएंगे। यूनिवर्सिटी ने भारत के इस प्रतिभाशाली पुत्र को सम्मानित करने को अपना गौरव समझते हुए यह निर्णय लिया कि समारोह 5 जून, 1952 को आयोजित किया जाए। मई के चौथे सप्ताह में वह सूची प्रकाशित हुई जिसमें उपाधि प्राप्त करने वाले गौरवशाली लोगों के नाम थे, और उनमें डॉ. अम्बेडकर का नाम भी था। उनकी इस सफलता पर मिले प्रशंसको और शुभचिंतकों द्वारा लिखे जाने वाले बधाई पत्रों की बाढ़-सी आ गई। भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी उनकी इस उपलब्धि पर गर्व हुआ और उन्होंने निम्नलिखित शब्दों में डॉ. अम्बेडकर को बधाई दी। अपने पत्र में उन्होंने कहा :

2, किंग एडवर्ड रोड

नई दिल्ली

26 मई, 1952 सत्यमेव जयते

प्रिय डॉ. अम्बेडकर जी,