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अपने पैरों का उपचार भी कराएंगे।

डॉ. अम्बेडकर के प्रस्थान की पूर्व संध्या पर सिद्धार्थ कॉलेज के डॉ. पाटनकर और श्री चित्रे ने सी.सी.आई. में डिनर का आयोजन किया। कभी भी किसी ने गंभीरता से डॉ. अम्बेडकर की देशभक्ति पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाया है और डिनर के पश्चात हुई वार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका प्रवास के दौरान भारत को नीचा दिखाने की उनकी मंशा कभी नहीं रही।

एक अत्यंत दिलचस्प वार्तालाप के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने रहस्योद्घाटन किया कि उन्हें मौलाना आजाद की हिंदी बहुत अच्छी लगती है। उन्होंने कहा कि, ‘‘अगर वही वह हिंदी है न कि अत्यंत संस्कृतनिष्ठ हिंदी अपनाने को हमें कहा जाता है तो यह बहुत अच्छी बात होगी।’’ डॉ. अम्बेडकर ने यह भी कहा कि मौलाना की हिंदी में अरबी, फारसी या संस्कृत के शब्द नहीं के बराबर होते हैं, फिर वह अत्यंत शुद्ध, स्वच्छ और स्तरीय होती है।’’

जिस हवाई जहाज में डॉ. अम्बेडकर सवार थे, उसने लगभग मध्यरात्रि में बंबई के सांताक्रूज एयरपोर्ट से उड़ान भरी। अपने कंधे पर एक ओवरकोट टांगे और सिर पर टोपी पहने हुए डॉ. अम्बेडकर ने काले रंग की टाई लगाई हुई थी। अपनी चिर-परिचित मुस्कान से उन्होंने लोगों को ‘गड बाइ’ कहा। ये सारी चीजें फ्री बुलेटिन के 2 जून, 1952 के अंक में मुख्य पृष्ठ में छपी एक तस्वीर के रूप में कैद हैं।

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कोलंबिया यूनिवर्सिटी में डॉ. अम्बेडकर का सम्मान

न्यूयॉर्क 6 जून, 1952। कल कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने अपने 198वें दीक्षांत समारोह में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर को मानद उपाधि प्रदान करते समय उन्हें, ‘‘भारत के अन्यतम नागरिकों मे से एक महान समाज सुधारक और मानवाधिकारों का अग्र पंक्ति का योद्धा करार दिया।

कानून और ज्ञान की मानद डॉक्ट्रेट उपाधि डॉ. अम्बेडकर ने भारी उपस्थिति के समक्ष उस समारोह में प्राप्त की जिसमें पढ़ाई पूरी करने के बाद कोलंबिया के 17 स्कूलों और कॉलेजो के 6,848 स्नातक उन्हें देखने आए थे। डॉ. अम्बेडकर के साथ सम्मानित होने वाले अन्य लोगों में कनाडा राष्ट्र के विदेश सचिव श्री लास्टर बी. पीअर्शन, प्रख्यात फ्रांसीसी इतिहासकार श्री डैनियल मोरनेट तथा आठ अमेरिकी नागरिक थे।

(द टाइम्स ऑफ इंडिया, 7-6-1952 पष्ष्ठ 6)