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440 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भारतीयों को डर था कि डॉ. अम्बेडकर अमेरिका में अपने प्रवास के दौरान भारत में व्याप्त छुआछूत की समस्या पर भयंकर हमला बोलेंगे, ताकि इस अन्यायपूर्ण रिवाज पर दुनिया का ध्यान खींच सकें तथा इस प्रकार इस समस्या को हल करने में भारतीय सरकार की असफलता को उजागर करेंगे। लेकिन यह भय निराधार है, क्योंकि डॉ. अम्बेडकर सबसे पहले एक भारतीय है और वे अपनी मातृभूमि शान को

खराब करने का कोई कार्य नही करेगें।

डॉ. अम्बेडकर ने सबके प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संयुक्त राज्य में भाषण देने का कोई कार्यक्रम नहीं है इसलिए किसी को भी इस भय में रहने की जरूरत नहीं है कि वह इस देश के बारे में कुछ भी ऐसा कहेंगे जो कड़वा हो।

डॉ. अम्बेडकर बोले कि यद्यपि ऐसा कहा जाता है कि मेरा स्वभाव कड़वा है और मैंने कई बार आगे बढ़कर सत्ता के लोगों से संघर्ष करने की स्थिति बनाई है। उन्होंने किसी भी मौके पर देश से गद्दारी नहीं की है। देश के हित उनके हृदय में सर्वोपरि है। बोले कि गोलमेज सम्मेलन में भी वह, ‘‘महात्मा गांधी से 200 मील आगे रहे थे जहां तक कि भारत के हित की बात है।’’

(द टाइम्स ऑफ इंडिया, सोमवार, 21 जून, 1952 पष्ष्ठ 2 कॉलम 3)

डॉ. अम्बेडकर के आगमन के अवसर पर आयोजित इस डिनर पार्टी के बारे में प्रकाश डालते हुए ‘द इवनिंग न्यूज ऑफ इंडिया’ के एक स्तम्भकार ने कहा कि

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यह भाग्य की विडंबना है-सिद्धार्थ कालेज के प्राचार्य यू.एम. पाटनकर को उद्धृत करें तो-भारत की किसी भी यूनिवर्सिटी ने हमारे संविधान के निर्माताओं में से प्रमुख डॉ. भीमराव अम्बेडकर को मानद उपाधि से अलंकृत कर उनका सम्मान करने के लिए पहल नहीं की। स्वयं बाम्बे यूनिवर्सिटी जहां डॉ. अम्बेडकर छात्र रह चुके हैं, ‘सुस्त और मंद’ रही है।

डॉ. अम्बेडकर को डॉक्टर ऑफ लॉज की मानद उपाधि देकर सम्मानित करने में प्रथम होने का श्रेय भी यूनिवर्सिटी को चला गया है जहां हमारे विद्वान डॉक्टर साहब छात्र रह चुके है।

पिछले सोमवार को एक टी.डब्ल्यू.ए. वायुयान द्वारा डॉ. अम्बेडकर संयुक्त राज्य के लिए रवाना हुए। संयुक्त राज्य में वह कुछ सप्ताह ही रुकेंगे जहां वह