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(1) स्वर्गीय श्री एल.आर. गोखले की प्रतिमा का अनावरण करना।
(2) श्री ए.बी. सेठना और श्री एच.बी. तुलपुले जो कि दोनों ही बार के वरिष्ठ
सदस्य थे, के द्वारा दान की गई पुस्तकों के संग्रह को लोकार्पित करना
और उन्हें लॉ लाइब्रेरी में स्वतंत्र अनुभाग के रूप में रखवाना।
डॉ. भीमराव अम्बेडकर और श्रीमती अम्बेडकर ने सहर्ष यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया।
पूना डिस्ट्रिक्ट लॉ लाइब्रेरी के अध्यक्ष के रूप में डिस्ट्रिक्स तथा सेशन न्यायाधीश श्री पी.सी. भट्ट ने समारोह की अध्यक्षता की।
संगीत कलानिधि मास्टर कृष्णराव फुलाम्ब्रिकर ने डॉ. अम्बेडकर एवं उनकी पत्नी के सम्मान में स्वागत गान गाया। आयोजक बंधुओं में से एक श्री एस.जी. भट्ट ने इस स्वागत गीत की रचना की थी। उपाध्यक्ष श्री के.एम. चौव्वल ने स्वागत भाषण दिया। मानद सचिव श्री वी.बी. मोगटे ने पुस्तकालय की रिपोर्ट पढ़कर सुनाई।
श्री बी.डी. पाल ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर से अनुरोध किया कि वे स्वर्गीय श्री एल.आर. गोखले की प्रतिमा का अनावरण करें तथा ए.बी. सेठना और एच.बी. तुलपुले द्वारा प्रदत्त पुस्तकों के पुस्तकालय का लोकार्पण करें। इस अवसर पर अध्यक्ष श्री पी.सी. भट्ट ने ये बातें कहीं।
‘‘देवियो और सज्जनों, बेंच के तथा बार के सदस्यों
मुझे यह नेक काम दिया गया है कि मैं हमारे मुख्य अतिथि महोदय से यह अनुरोध करूं कि वे आज के विषय पर चंद शब्द बोलें। मेरा स्वास्थ्य खराब होने के कारण मैं अधिक नहीं बोलूंगा, इसलिए कृपया मुझे माफ करें। अब मैं मुख्य अतिथि महोदय से अनुरोध करता हूँ कि वे कृपया एक विषय पर हमें संबोधित करें।
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डॉ. अम्बेडकर का संबोधन
अध्यक्ष महोदय तथा सज्जनो,