448 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जब मुझे बुलावा मिला मैंने आपके सचिव को खत लिखा कि मैं यह जानने का बहुत इच्छुक हूं कि वे कौन-कौन से मुद्दे होंगे जिनमें इस जिला पुस्तकालय के सदस्यों की रुचि होगी। कारण कि ऐसी हो सकता है कि यहां आकर मैं ऐसे किसी विषय पर बोलूं जिसमें उन्हें कोई दिलचस्पी न हो। यदि ऐसा होगा तो मेरे आने का न तो आपको कोई फायदा होगा न मुझे। लेकिन यह उनका बड़प्पन था कि उन्होंने मुझे चार विषयों की एक सूची प्रेषित कर दी। उन्होंने कहा कि, ‘आप इन चारो में से कोई एक विषय चुन लें।’ मैं उन्हें जवाब भेज देने की हड़बड़ी में था और यह नहीं बता सका कि मैंने वास्तव में किस विषय पर बोलने का निर्णय लिया है। हालांकि मैंने उन्हें मोटे तौर पर यह बता दिया था कि मैं चार में से एक विषय चुन लूंगा और यदि मैंने चार में से एक विषय नहीं चुना तो भी मैं उनके द्व ारा निर्धारित चार विषयों की लक्ष्मण-रेखा का उल्लंघन नहीं करूंगा। उनके द्वारा बाताए गए विषयों में से मुझे संसदीय लोकतंत्र ने आकर्षि किया और मुझे लगा कि यही वह विषय है जिस पर मैं बोल सकूंगा। जो विषय मैंने चुना है वह संसदीय लाकतंत्र से बहुत नजदीक से जुड़ा है और वह मेरे नजरिये से और मैं समझता हूं कि देश के नजरिये से एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। तो आज की इस संध्या में मैं जिस मुद्दे पर आपके समक्ष बोलने जा रहा हूं मेरे शब्दों में वह विषय है, ‘‘लोकतंत्र के सफलतापूर्वक परिचालन हेतु पूर्व परिस्थितियां’’ वे कौन-सी पूर्व परिस्थितियां हैं जिनका अस्तित्व में होना लोकतांत्रिक सरकार के निर्बाध रुप में कार्य करते रहने के लिए बहुत जरूरी है। इसी विषय पर मैं कुछ बातें कहना चाहता हूं।
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विषय के लिए पृष्ठभूमि
अब इससे पहले कि मैं इस मुद्दे पर बोलूं, मैं इस विषय के लिए पृष्ठभूमि के रूप में सर्वप्रथम कुछ आरंभिक तथ्यों को प्रस्तुत करना चाहता हूं।
सबसे पहली निष्पति जो मैं प्रस्तुत करना चाहता हूं वह यह है कि लोकतंत्र के स्वरूप में सदैव परिवर्तन हो रहा है। हम लोकतंत्र की बात करते हैं, लेकिन लोकतंत्र हमेशा एक-सा नहीं रहता है। यूनानी लोग एथेंस के लोकतंत्र की बात करते हैं। लेकिन यह सर्वविदित है कि एथेंस का लोकतंत्र में शामिल लोगों में से लोकतंत्र से उतना ही भिन्न है जितना कि खडि़या मिट्टी से पनीर। एथेंस के लोकतंत्र में शामिल लोगों में से 50 प्रतिशत गुलाम थे, केवल 50 प्रतिशत स्वतंत्र थे। जो 50 प्रतिशत गुलाम थे उनकी सरकार में कोई साझेदारी नहीं थी। इसलिए निश्चित रूप से हमार लोकतंत्र एथेंस के लोकतंत्र से काफी भिन्न है।
एक दूसरा आरंभिक तथ्य जिस पर मैं आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा, वह ये है कि एक ही देश में भी लोकतंत्र एक जैसा नहीं होता है। आप चाहें तो