138 22.12.1952 लोकतंत्र को सफलतापूर्वक चलाने के लिए शर्तें - Page 480

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कि लोकतंत्र वह पौधा नहीं जो हर जगह उग सके। यह अमेरिका में उगा है। यह इंग्लैंड में उगा है। कुछ हद तक यह फ्रांस में उगा है। जी हां, यही वह उदाहरण है जिनसे हम यह देखने के लिए कुछ साहस प्राप्त कर सकते हैं कि अन्य स्थानों पर क्या हुआ है। आपको याद होगा कि प्रथम यूरोपीय युद्ध तथा आस्ट्रिया-हंगरी सामाज्य के टूटने के परिणामस्वरूप विल्सन ने आस्ट्रिया से मुक्त कुछ छोटे-छोटे राष्ट्रों को उनकी अपनी इच्छाओं आत्मनिर्णय के आधार पर उत्पन्न किया। उन सबकी शुरुआत लोकतांत्रिक संविधान, लोकतांत्रिक सरकार के साथ हुई और उन्होंने अपने संविधान में मूल अधिकारों का प्रावधान किया था जो कि वर्साइल्स के उनके शांति समझौते के पालन के लिए बाध्यकारी थे। मित्रां, उस लोकतंत्र की क्या गति हुई? क्या अब वहां उसका नामों-निशान भी बचा है? यह अब समाप्त हो गया है। सब का सब लुप्त हो गया है। संभवतः अब वे अन्य देशों के वर्चस्व या उनकी निगरानी के अधिन हैं।

अब वहां कोई लोकतंत्र नहीं रहा। कुछ ताजा उदाहरणों को देखें। सीरिया में लोकतांत्रिक शासन था। कुछ वर्ष उपरांत वहां सैनिक विद्रोह हुआ और सीरिया के कमांडर-इन-चीफ ने सीरिया की सत्ता हथिया ली। प्रजातंत्र हवा में उड़ गया। मिश्रका दूसरा उदाहरण लें। सन् 1922 से 30 साल तक वहां भी प्रजातांत्रिक व्यवस्था थी। एक रात्रि को फारुक को हराया गया और नजीब तानाशाह बन बैठे। उसने मिश्रका संविधान समाप्त कर दिया।

ये सब उदाहरण हमारे समक्ष हैं। हमें अपने भविष्य के संबंध में बहुत सावधान और विचारशील बने रहने की आवश्यकता है। आपको विचार करना पड़ेगा कि क्या हमें बहुत सकारात्मक कदम नहीं उठाने चाहिए ताकि हम अपने लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए हमारे मार्ग में जो बाधाएं हैं जो अड़चने हैं उन्हें हटा दें। हमने आपके अंदर चेतना नहीं जगाई है, यह एक ऐसी समस्या है जिससे हम बेखबर नहीं रह सकते। मुझे स्वयं को धन्यवाद देना चाहिए कि मैंने वह सब कार्य कर दिया है।

अब देविया और सज्जनो, मैं आपको और अधिक समय तक रूकना नहीं चाहता और मेरे विचार ध्यानपूर्वक सुनने के लिए आप सबको धन्यवाद देता हूं। ख्1,

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1 यह पुस्तिका डी.डी. गंगल, लोक संग्रह प्रेस, 624 सदाशिव 46, पूना-2 द्वारा मुद्रित तथा वी.बी. गोगटे, एल. एल.बी., वकील, मानद, सचिव पूना जिला कानून पुस्तकालय, पूना-5 द्वारा प्रकाशित।