470 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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राजनीति राष्ट्र के जीवन का सर्वस्व और सर्वसमाप्ति
‘‘जुलाई और अगस्त 1953 में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर अपने कॉलेजों के
कार्यों में पूरी तरह व्यस्त थे। जुलाई और अगस्त के सभी दिनां के दौरान वह
औंरगाबाद में ही रूके रहे। वहां पर उन्होंने हैदराबाद के अनुसूचित जाति फेडरेशन
के कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित किया।
राजनीति राष्ट्र के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नहीं है। उन्होंने उन
सभी से निवेदन किया कि वे भारत की समस्याओं को उनके सभी पक्षों, राजनीतिक,
सामाजिक, धार्मिक व आर्थिक को दृष्टिगत करते हुए समझें, और फिर स्वेच्छा से
दलितों के उद्धार के लिए संघर्ष करें। इस सभा में उन्होंने लोगां को आगाह करते हुए
कहा कि वह अपने उन लोगों का बहिष्कार करें जो हिंदू धार्मिक स्थलों की तीर्थयात्राएं
करते हैं। उन्होंने कहा कि इससे उन लोगों का कोई हित नहीं होगा।’’ ख्1,
1 कीर, पृष्ठ 447-448