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हम केंद्र सरकार के खिलाफ भी अखिल भारतीय भूमि
सत्याग्रह जारी रखेंगे
‘‘आज दिनांक 16 नवंबर, 1953 को नई दिल्ली में अनुसूचित जाति फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने हैदराबाद राज्य के मराठवाड़ा के अपने पार्टी सदस्यों से औरंगाबाद जिले में अपनी भूमि सत्याग्रह वापस लेने का आग्रह किया।
सत्याग्रहियों के साथ अच्छे बर्ताव के लिए उन्होंने हैदरबाद सरकार को धन्यवाद किया। राज्य सरकार ने भूमि वापस करने के लिए आदेश जारी कर दिये हैं और वह कम्युनिस्ट गतिविधियों वाले जंगली क्षेत्रों में सफाये के पश्चात् उसका आवंटन अनुसूचित जातियों को करने के एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि ‘‘मेरा मानना है कि यह एक वैध शिकायत के लिए एक अच्छी पहल है।’’ 1700 सत्याग्रहियों में से कुछ 1100 को बिना किसी शर्त के राज्य सरकार द्वारा बिना मुकदमा चलाये छोड़ दिया गया था। ‘‘मैं यह जरूर कहूंगा कि यह अत्यंत उचित कदम है।’’
डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि मुझे ज्ञात हुआ है कि कुछ सत्याग्रही पेड़ों को काट रहे है। इसके लिए मैं खेद व्यक्ति करता हूं। हमारा उद्देश्य पेड़ों को काटना नहीं, बल्कि खेती के लिए भूमि प्राप्त करना था।’’
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि वह ये बयान की गलतफहमियों को समाप्त करने के लिए जारी कर रहे हैं। फेडरेशन के कुछ सदस्यों का कहना था कि हैदराबाद राज्य के सत्याग्रह को उन्होंने अधिकृत नहीं किया था। ‘‘इस सत्याग्रह को मैंने अधिकृत किया था और बहुत अच्छे कारणों से किया था।’’
‘‘पूरे देश में अनुसूचित जातियों के लोग बिना भूमि और बिना काम के भीषण गरीबी रेखा में जी रहे हैं और जब मैंने पाया कि हैदराबाद सरकार ने पहले तो कुछ बंजर भूमि खेती के लिए दे दी थी लेकिन जब लाभाथियों ने उन्हें जोत-बो लिया और फसल काटने का इंतजार कर रहे थे और तब उनसे जमीनें वापस ले लीं, तो कार्यवाही करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।’’ उन्होंने यह भी कहा कि, ‘‘नेताओं का पहला और सर्वप्रमुख कर्तव्य है अनुसूचित जातियों के हितों को