472 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आगे बढ़ाना और यदि उनके हितों पर संकट की नौबत आ जाती है और तब भी नेता कुछ करने के लिए तैयार नहीं हो जाता तो यह उनसे विश्वासघात है।’’
डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि, ‘‘यदि हमारे धैर्य का बांध टूट गया, तो हम केंद्र सरकार के खिलाफ भी अखिल भारतीय स्तर पर भी सत्याग्रह जारी रखेंगे। अगर सिख ऐसा कर सकते हैं तो अनुसूचित जातियां क्यों नहीं कर सकती?’’
इसलिए जो लोग सत्याग्रह का विरोध कर रहे हैं, उनके लिए बेहतर यही है कि वे फेडरेशन छाड़ दें।
दूसरी गलतफहमी का संबंध हैदराबाद राज्य अनुसूचित जाति फेडरेशन के पुनर्गठन से संबंधित है। अखिल भारतीय फेडरेशन के महासचिव श्री पी.एन. राजभोज का यह बयान, कि महासंघ की कार्यवाहक समिति ने इस शाखा को चार अलग-अलग शाखाओं में बांटने का निर्णय लिया है, एक तथ्य है और निर्णय अंतिम है।
उन्होंने कहा कि संगठन की यह संरचना केवल हैदराबाद राज्य के लिए नहीं बनायी गयी है, बल्कि जहां-जहां फेडरेशन मौजूद है पूरे देश में इसे अपनाया गया है। उन्होंने फेडरेशन के सदस्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि भले ही अब तक फेडरेशन का रुख उन लोगों के लिए नरम रहा था जिन्होंने फेडरेशन आदेशों का उल्लंघन किया, आइंदा ऐसे लोगों के प्रति कोई नरमी नहीं दिखायी जाएगी जो उनका उल्लंघन करते हुए काम करेंगे।’’ ख्1,
1 द नेशनल स्टैंडर्ड 17 नवम्बर, 1953