502 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
14 अक्तूबर, 1956 को लोग जल्दी उठ गए और नारे लगाते हुए एक जुलूस की शक्ल में दीक्षा भूमि की ओर चल पड़े। 2-2.5 लाख की भीड़ से 7 बजे तक आधा पंडाल भर चुका था। समारोह की व्यवस्था नागपुर और बंबई के ‘समता सैनिक दल’ को सौंपी गई थी। इस समारोह के लिए केवल 10-15 पुलिस वाले तैनात किए गए थे। मीडिया के लिए विशेष प्रबंध किया गया था। भारत और अन्य देशों से लगभग 30 प्रेस रिपोर्टर थे। धर्मांतरण के इच्छुक लोगों की संख्या इतनी अधिक थी कि सारे प्रवेश पत्र समाप्त हो गए थे और अंत में व्यवस्थापकों को घोषणा करनी पड़ी कि समारोह सबके लिए खुला है।
धर्मांतरण समारोह
महास्थिवर भिक्षु चंद्रमणी के साथ डॉ. बी.आर. अम्बेडकर स्थल पर 9ः30 पर आए। उस समय तक वहां 5-6 लाख लोग जमा हो चुके थे। समारोह में उपस्थित अन्य भिक्षु ये थे :
थीरो पन्नाटिस, सांची विहार, भोपाल।
वेन भिक्षु एच सिद्धातिस्सा, पइए, श्रीलंका।
वेन एम. सोघरत्ना, सारनाथ, बनारस।
भिक्षु जी, प्रज्ञानद, बुद्ध बिहार, लखनऊ।
रेव. परमसंधि।
समारोह का आरंभ कुमारी इंदुताई वाराले के स्वागत गान के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर के पिता रामजी मालोजी सूबेदार को हार्दिक श्रद्धांजलि दी गई। तत्पश्चात् डॉ. बाबा साहेब और माई साहिब करबद्ध भगवान बुद्ध की मूर्ति के सामने खड़े हुए। महास्थिवर चंद्रमणी ने उनके लिए पाली में त्रिशरन एवं पंचशील का पाठ किया :
नमोतस्सा भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धासा
नमोतस्सा भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धासा
नमोतस्सा भगवतो अराहतो सम्मा सम्बुद्धासा
अर्थ :
(उसके सम्मान में जो पवित्र है, जो योग्य है, जो पूर्णतया प्रबुद्ध है)