158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 548

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है। यह लोगों को याद दिलाने के लिए किया जाता है कि ईसा मसीह ने उनसे क्या करने को कहा था। आपको शायद ताज्जुब होगा कि 90 फीसदी ईसाइयत, सार और रूप दोनों में, बौद्ध धर्म की नकल है। आप रोम जाकर प्रधान चर्च को देखिए और आपको बेरूत के उस विशाल मंदिर की याद आएगी जिसे ‘विश्व कर्म’ के नाम से जाना जाता है। विशाबिग्ने ने, जिन्होंने बौद्ध धर्म पर एक पुस्तक लिखी थी और चीन में प्रचारक थे, इस पर बड़ा आश्चर्य व्यक्त किया था कि बौद्ध और ईसाई धर्म के बीच यह समानता क्यों है। जहां तक दृष्टिकोण का प्रश्न है, उन्होंने यह कहने का साहस नहीं किया कि बौद्धों ने ईसाइयों की नकल की, परंतु उन्होंने यह भी स्वीकार नहीं किया कि ईसाइयों ने बौद्धों की नकल की। मेरे विचार से समय आ गया है कि बौद्ध लोगों के बीच अपने धर्म का प्रचार करने के लिए हम ईसाइयों के कुछ तरीकों की नकल करें। उनको पता रहना चाहिए कि बुद्ध का धर्म हर समय, हर दिन मौजूद है, उनके साथ एक पुलिस के सिपाही की तरह उनकी सुरक्षा के लिए खड़ा है कि कहीं वे गलत रास्ते पर न चले जाएं। उसके बिना यह धर्म शायद बहुत पतन की स्थिति में रहेगा। मैं पाता हूं कि बौद्ध देशों तक में इसकी स्थिति बहुत जीर्ण-शीर्ण है। लेकिन इसके प्रभाव को लेकर कोई संदेह नहीं है।

अंत में मैं आपको एक बहुत दिलचस्प चीज बताना चाहूंगा जो मैंने बर्मा में देखी थी। मैं बर्मा गया था जहां मुझे एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए बुलाया गया था। वे मुझे यह दिखाने ले गए कि वे गांवों का किस तरह से पुनर्निर्माण करने जा रहे हैं। मैं बहुत खुश था। उनके साथ मैं उन गांवों में गया जिनकों उन्होंने सुधारने की योजना बनाई थी उनकी गलियां हमेशा की तरह बदसूरत, यहां-वहां मुड़ी हुई थी। कुछ भी व्यवस्थित नहीं था। इसलिए कमेटी ने लोहे के खंभे गाड़ दिए और लाइन में रस्सियां लगा दी कि यह सड़क इस ओर से निकलनी चाहिए। बहुत सारे मामलों में पाया कि कमेटी द्वारा खींची गई लाइनें जमीन के उस एक टुकड़े से होकर जाती थीं जो किसी व्यक्ति का था। जब मैं वहां गया और और वहां देखकर पूछा, ‘‘वे इसका इंतजाम कैसे करेंगे? जिस जमीन को आप लेने जा रहे हैं, क्या आपके पास उसका भुगतान करने के पैसे है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसी को पैसा नहीं चाहिए। हर किसी ने कहा यदि आप चाहते हैं, इसे ले लें।’’ ऐसा क्यों, जबकि मेरे देश में यदि आप हरजाना दिए बगैर किसी की जमीन का एक टुकड़ा भी लेते हैं तो खूनखराबा हो जाता है। लेकिन यहां ऐसा क्यों? बर्मा लोगों को अपनी संपत्ति की इतनी फिक्र क्यों नहीं। वे इसकी परवाह क्यों नहीं करते? कारण यह है कि बुद्ध ने ‘सर्वम अनित्यम’ की शिक्षा दी है। जो कुछ आप देखते हैं, अस्थायी है। अस्थायी चीजों के लिए क्यों लड़े? अगर आप चाहते हैं, तो लीजिए जमीन।