158. 15.10.1956 बौद्ध धर्म विश्व का उद्धारक होगा - Page 547

526 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दोनों की तुलना करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि विश्व की महान समस्या, अर्थात् दुख के संबंध में बुद्ध की सलाह यह है दुख को समाप्त किया जाना चाहिए, और कि बुद्ध की पद्धति सबसे सुरक्षित और विश्वस्त थी। अतः बौद्ध देशों की युवा पीढ़ी को मैं यह सलाह देना चाहूंगा कि उनको बुद्ध की वास्तविक शिक्षाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए। निष्कर्ष के तौर पर यदि मैं यह कहूं कि बौद्ध देश में धर्म को यदि कोई संकट आता है, तो उसका दोष भिक्षुओं को देना चाहिए, क्योंकि व्यक्तिगत रूप से मैं यह सोचता हूं कि वे अपने कर्तव्य का पूरी तरह से पालन नहीं कर रहे हैं। प्रवचन कहां है? अपना भोजन करते हुए, निस्संदेह एक ही बार करते हुए भिक्षु अपने विहार में रह रहा है और चुपचाप बैठा है। वह संभवतया पढ़ रहा है, और अधिक संभावना यह है कि उसे सोते हुए पाता हूं, और शाम को थोड़ा संगीत श्रवण का अवसर आता है। धर्म के प्रचार-प्रसार का यह तरीका नहीं।

मेरे मित्रों मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मैं किसी की आलोचना करना नहीं चाहता, लेकिन यदि धर्म समाज के पुनरूत्थान के लिए नैतिक शक्ति है तो आपको इसे लोगों के कानों में डालते रहना चाहिए। बच्चे को स्कूल में कितने दिन और कितना समय बिताना पड़ता है? आप बच्चे को एक दिन स्कूल भेजकर दूसरे दिन घर पर बिठा लेते हैं और फिर यह आशा करते है। कि पढ़ाई में आगे बढ़ जाएगा और शिक्षित हो जाएगा। बच्चे को हर स्कूल जाना होता है, पांच घंटे तक वहां बैठना होता है और लगातार पढ़ना-लिखना पड़ता है। केवल और केवल तब ही बच्चा उससे संतृप्त हो पाता है जिसे ज्ञान कहा जाता है, शिक्षा कहा जाता है। यह मठ कोई राज्य नहीं है। मैंने कभी नहीं देखा कि भिक्षु लोगों को मठों में किसी एक दिन बुलाकर किसी समय प्रवचन या नैतिक शिक्षा देते हों।

मैं श्रीलंका गया और लोगों से कहा कि मैं खासतौर पर यह देखने को उत्सुक हूं कि भिक्षु किस तरह से प्रवचन देते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास बन है। वे बन शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिसका अर्थ मुझे बाद में पता चला कि ‘वनक’ है। 11 बजे से मुझे एक स्थान पर, एक छोटी-सी चौकोर, इस मेज जितनी बड़ी चीज पर ले गए और मैं जमीन पर बैठ गया। एक भिक्षु अंदर बुलाए गए। अनेक महिलाएं और पुरुष पानी लाए और उसके पांव धोए, और फिर वह उठा और वहां बैठ गया। उसके पास एक पंखा था। भगवान ही जानता है कि उसने क्या कहा। निश्चित है कि उसने प्रवचन सिंहली में ही दिया होगा। यह दो मिनट से ज्यादा नहीं चला और दो मिनट के बाद वह चला गया।

आप ईसाइ चर्च में जाइए, वहां क्या होता है? लोग वहां हर सप्ताह जमा होते हैं। वे उपासना करते हैं, और एक पादरी बाइबिल के विषय पर प्रवचन करता