परिशिष्ट-III खरी खरी बात। - Page 563

542 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ब्रिटिश सरकार से जब बंगाल के मौजूदा मंत्रिमंडल को उलट देने और धारा-93 के अधीन सरकार प्रस्तुत करने का आग्रह किया था तब वह किसी प्रकार से अपने निजी विचारों या इच्छाओं को व्यक्त नहीं कर रहे थे। वह किसी मायने में अपवाद नहीं थे। और भावी संविधान का निर्माण करने में विभिन्न राष्ट्रीयताओं को उन तथ्यों का ध्यान रखना चाहिए और देखना चाहिए कि भारत का राजनीतिक भविष्य गुलामी के गड़े मुर्दे के आगे नहीं झुकता और शासक वर्ग को एक बार फिर अधिनायकवादी सिंहासन पर नहीं बिठाती है। अपनी खरी-खरी बातों से ‘‘डॉ. अम्बेडकर ने स्वतंत्रता के लक्ष्य की भारी सेवा की है और भारत के भविष्य की। इसके लिए हम उनको हृदय से धन्यवाद देते हैं।’’

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