46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
निष्ठापूर्ण ढंग से वैसे ही बनाए रखा, जैसे कि चीन के एक दर्जी ने जिसे एक पुराना कोट एक नमूने के तौर पर दिया गया था तो उसने बड़े गर्व से हुबहू उनकी नकल बनाई, सैम्पल अगर किसी जगह से फटा था या घिसा था तो तैयार कोट भी वैसा ही बनाया, जहां सैम्पल में कोई टाकी लगाकर पेवन सिली थी तो वैसी ही टाकी का पेवन नये तैयार कोट पर भी लगाया। तुम्हारे ऊपर किये जाने वाले अपराध खुले घाव की तरह नासूर बन रहे हैं और उनके इलाज के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया। मैं कहता हूं कि ब्रिटिश सरकार प्रेरणावश तथा सैद्धान्तिक आधार पर गतिशील होते हुए भी तुम्हारे कष्टों से अनभिज्ञ और कुछ भी करने में असमर्थ बनी रहेगी। कोई भी तुम्हारा वैसा कष्ट निवारण नहीं कर सकता जैसा तुम स्वयं कर सकते हो और तुम स्वयं भी अपने कष्ट निवारण तब तक नहीं कर सकते जब तक राजनीतिक शक्ति तुम्हारे अपने हाथों में न हो। जब तक ब्रिटिश सरकार वर्तमान जैसी बनी रहती है राजनीतिक शक्ति का एक अंश भी तुम्हारे हिस्से में नहीं आ सकता। स्वराज मिलने पर ही कुछ शक्ति अंश तुम्हारे हाथ में आने की संभावना है और शक्ति के बगैर तुम अपने भाईयों व बहनों के मसीहा नहीं बन सकते। मुझे ज्ञात है कि हममें से बहुतों को स्वराज तो एक अनैतिक भूत-प्रेत जैसा लगता है और यह एक सामान्य सोच है। स्वराज की सोचते ही उन्हें स्मरण हो आती हैं वे यातनाएं, अत्याचार व अन्याय जो उनके अपने ही देशवासियों ने उन पर ढाये थे और स्वराज में इस सबकी पुनरावृत्ति का भय उनको भयभीत करता है। परन्तु सज्जनो अगर आप एक क्षण भर के लिए अपने बीते कल को भुला कर स्वराज में भविष्य की कल्पना करें तो पाएंगे कि स्वराज कोई छलावा नहीं है। स्वराज में वह सब व्यवस्थाएं समाविष्ट हैं जिनसे तुम्हें दुष्कर्मियों और अत्याचारियों से रक्षा तथा बचाव वाली एक सरकारी शासन व्यवस्था और जिसमें आप स्वयं भागीदार होंगे और समानता का अधिकार प्राप्त कर सर्वोच्च अधिकार प्राप्त देश के शासकों के बीच स्थान भी पाएंगे। मन में भूतकाल की कष्टप्रद यादों को भुला दो। भय या लालच के प्रभाव-वश अपने निर्णयों में न डोलें। आपकी स्वार्थसिद्धि कहां सबसे अच्छी तरह होती है पर गम्भीरता से चिंतन करें और मुझे विश्वास है कि आप स्वराज के पक्ष में अपना लक्ष्य बनाएंगे।
- अगर आप यह निर्णय लेते हैं तो आप भविष्य की भारत सरकार के लिए साइमन आयोग की सिफारिशों से सहमत नहीं हो सकते। मैं विस्तार से सामइन आयोग की सिफारिशों का विवेचन नहीं कर सकता क्योंकि इसके लिए हमारे पास