218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कुछ नहीं कर रही, और न ही करने के लिए तैयार है। काँग्रेस ने जो प्रस्ताव रखा है उस आधार पर अगर कोई काँग्रेस के अंर्तरंग के बारे में निर्णय लेना चाहे तो यह प्रकट हो जाएगा कि कांग्रेस आम लोगों के लिए है या नहीं? इस बारे में निर्णय लेते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। काँग्रेस के आर्थिक प्रस्तावों में उच्च वर्ग और मध्य वर्ग के हितसंबंधों के बारे में ही प्रतिबिंब दिखाई देता है। उसके व्यापार से संबंधित प्रस्ताव का ताल्लुक केवल व्यापार और उद्यमियों से ही होता है। उसमें मेहनत करने वालों की कोई जगह नहीं। जो संगठन केवल एक चौथाई या एक षष्ठमांष लोगों के लिए ही काम करते हैं, उन्हें यह दावा करना छोड़ देना चाहिए कि वह सम्पूर्ण जनता का प्रातिनिधि संगठन है। नमक के सत्याग्रह का समावेश काँग्रेस के कार्यक्रम के साथ जोड़ देने से उसके बुनियादी चेहरे में कोई फर्क नहीं आने वाला। नमक पर लगाए गए कर विरोध में जिस तरह जोरदार निंदा की जा रही है, वह राजनीतिक आंदोलन का ही एक हिस्सा है। लेकिन जिस तरह हलवा खाए बगैर हलवे के स्वाद का पता नहीं चलता, उसी तरह नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी आम जनता कुचली न जाए इसके लिए क्या उच्चवर्ग के कंधों के सहारे खड़ा किया जाएगा? और इसी एक बात से इस आंदोलन की सफलता निर्भर करती है। उसके पीछे ईमानदार उद्देश्य है या नहीं उसे केवल आने वाला समय ही स्पष्ट कर पाएगा। लेकिन मुझे इस बारे में कोई आशंका नहीं कि जब-जब निर्णय लेने की घड़ी आती है तब-तब काँग्रेस के लोग आम जनता की ओर आंख मूंदकर केवल उच्च वर्ण का ही पक्ष लेते हैं। इस बारे में मुझे कोई शक नहीं है। आम जनता के प्रति कँंग्रेस का उदासीन और बेफिकर रहना मानो एक प्रकार से अनिवार्य ही है। क्योंकि वह राष्ट्रवादी लोगों का नेतृत्व करती है और वह कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है। इसलिए वहां नीति और कार्यक्रम काफी व्यापक होना जरूरी है। सब जानते हैं कि किसी संगठन पर सब के हितसंबंधों की अनेकविध जिम्मेदारियां थोपी गईं तो सबके नाम पर वह केवल कुछ एक लोगों का ही हित साध सकती है। और हितसंबंधों में अगर कोई विरोध पैदा हुआ तो दुर्बल लोगों को आंधी के हवाले कर दिया जाता है। ऐसे में मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि हम यह उम्मीद कांग्रेस से कैसे लगा सकते हैं कि वह हमारे लिए काम की जिम्मेदारी का निर्वाह करेगी और जब हमारे प्रतिपक्ष के साथ विरोध पैदा होगा, उस समय जो कि तय है, हम यह उम्मीद भी कैसे करें कि वह हमारा पक्ष लेकर लडे़गी।
- हममें से जो काँग्रेस की सेवा करने के लिए व्याकुल हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि स्वराज प्राप्ति के बाद इस सेवा के बदले में काँग्रेस हमारी अस्पृश्यता को नष्ट करेगी, और हमने, यदि अभी उसकी सेवा नहीं की तो, बाद में वह हमें गुलाम ही बना कर रखेगी। मुफ्त की मदद का कोई मुआवजा नहीं इस गुनाह के लिए। इसलिए उपरोक्त सोच के बारे में अपनी राय व्यक्त करना जरूरी नहीं है, ऐसा मैं