33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 237

220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हुए प्रस्ताव के रूप में सरकार के सामने हमने जो मांगें रखी हैं, उन पर सरकार की ओर से अन्य समुदायों की मांगों की तरह गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया जाता, इस बारे में मैं चिंतित होकर सोचता आया हूं। इससे मुझे यकीन हो गया है कि हम केवल अपने प्रांत तक ही आंदोलन छेड़ सकते हैं। किसी एक प्रांत में चलाए जा रहे आंदोलन को दूसरे प्रांत में समर्थन नहीं मिलता। लेकिन इस प्रकार का आंदोलन अगर पूरे देश के केंद्रीय संगठन द्वारा छेड़ा जाता तो निश्चित तौर पर उसे पूरे देश का समर्थन प्राप्त होता। मुझे लगता है कि इस मामले में दलित वर्ग के जागृत होने की आवश्यकता है। मुझे लगता है कि दलित वर्ग को जागृत होना चाहिए और अखिल भारतीय स्तर का एक संगठन खड़ा कर उसके द्वारा अपना आंदोलन संचालित करें। अब इसके लिए सही मौका मिल रहा है। पिछले दो-तीन सालों से ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लास एसोशिएशन नाम की एक संस्था बनी हुई है। लेकिन इस संस्था के अब तक केवल पदाधिकारी ही हैं, उनके सदस्य कोई नहीं हुए। यह तो एक खुला राज है। मेरे प्रांत में ठीक ऐसे ही हाल हैं। इस प्रकार झूठी और काल्पनिक संस्था दलित वर्ग की कोई सेवा नहीं कर सकती। आप लोगों को सचमुच एक जीवंत संस्था की स्थापना करनी चाहिए। आपको सचमुच एक जीवंत संस्था की स्थापना करनी होगी। उसके कार्यकर्ताओं का जाल पूरे देश में फैलाना होगा। कई कार्यकर्ताओं को उससे जोड़ना होगा और उसके द्वारा दलितों की भावनाएं आपको व्यक्त करनी होंगी। मेरे कहे अनुसार इस तरह का कोई संगठन खड़ा करने के लिए, उसका संविधान बनाने के लिए इसी सभा में अगर एक छोटी-सी कमेटी का गठन करेंगे तो बेहतर रहेगा। हमारी यह बहुत बडी कमी है जिसे जितनी जल्दी हो सके हमें पूरी करनी होगी।

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  1. सज्जनों! हमें राजनीतिक सŸा प्राप्त करनी होगी। इसीलिए इस विषय पर मैंने लंबे समय तक भाषण देकर आपको आग्रहपूर्वक अपने मन की बात बताई। लेकिन एक और बात भी बता दूं कि, दलित वर्ग के सभी रोगों पर केवल राजनीतिक सŸा की औषधि ही काम नहीं आ सकती। दलित वर्ग की मुक्ति सामाजिक उन्नति में है। दलित वर्ग को चाहिए कि वे अपने बुरे रीति-रिवाजों का त्याग करें। जीवनयापन के उनके जो बुरे मार्ग हैं उन्हें उनका त्याग करना होगा। जीवन जीने के तरीके में बदलाव करने से आपका रहन-सहन बेहतर होना चाहिए। इतना कि औरों के मन में आपके बारे में आदर की भावना पैदा हो और उन्हें आपसे मित्रता करने की इच्छा हो। आपको सुशिक्षित होना होगा। सिर्फ लिखने-पढ़ने का ज्ञान काफी नहीं होगा। हम में से कुछ लोगों को शिक्षा के आखिरी पायदान तक पहुंचना होगा। सो, उनके साथ आगे बढ़ कर पूरे समाज का दर्जा ऊंचा होगा। ”रखा जिस तरह अनंत