238 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मौलिक अधिकार ही तय किए हैं और इससे आगे जाकर दलित और एंग्लो इंडियन जैसी विशिष्ट जातियों का जिक्र करते हुए उनके लिए खास सिफारिशें की हैं।
महोदय, ऐसा नहीं कि ये सुधार केवल दलित वर्ग के हित में हैं, मैं यहां विनम्रता पूर्वक आपका ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहूंगा कि, ये सुधार सभी जातियों के और भारतीय नागरिकों के कल्याण के लिए हैं। देश की किसी भी नौकरियों पर किसी एक खास जाति का एकाधिकार प्रस्थापित करने की इजाजत देना कुल नागरिकों के साथ धोखा करना है ऐसा मुझे लगता है। गर ऐसा होता है तो उस विशिष्ट जाति के लोगों को सम्मान की जगहों पर रहने का सुरक्षात्मक दर्जा दिया जाता है जिससे कि न सिर्फ उन जातियों में श्रेष्ठत्व की भावना पैदा होती है, बल्कि लोगों के कल्याणकारी मार्ग पर वह एक संकट बन जाता है और उन्हें उस जाति पर ही निर्भर होकर रहने पर मजबूर होना पड़ता है। इसीलिए मेरा निवेदन है कि, चूंकि हम भारत के लिए नए संविधान का निर्माण कर रहे हैं इसलिए भारतीय नागरिकों में से हर एक को उसकी योग्यता के अनुसार देश की हर सरकारी नौकरी करने की इजाजत मिले ऐसी पद्धति निर्माण करना हमारा कर्त्तव्य है। मैं जो सुधार यहां सबके सामने रख रहा हूं वह केवल समिति की रिपोर्ट में प्रकाशित दर्ज तथ्यों पर आधारित तर्कशुद्ध परिणाम मात्र हैं जो कि, चौथे विभाग में से पहले उपविभाग में दर्ज हैं।
”इस उपसमिति की राय यही है कि, नई राज्य व्यवस्था की भारत की नई भावी सरकार और भारत की सुरक्षा ज्यादा से ज्यादा भारतीय लोगों से ही जुड़ा हो, ब्रिटिशों के साथ नहीं।“
महोदय, अगर इस कथन का कुछ मतलब हो तो भारत की सुरक्षा अधिकाधिक अनुपात में भारत की सभी जनता के साथ जुड़ी हो, किसी एक जाति के साथ उसके जुडे़ होने से कोई फायदा नहीं होगा।
इसीलिए, मेरा सुझाव है कि मैंने जो संविधान सुधार प्रस्तुत किए हैं, उनको स्वीकार किया जाए।“
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के भाषण के बाद हुए विचार-विमर्ष में मि. थॉमस कहते हैं कि उपसमिति द्वारा साफ तौर पर भारतीयकरण ( Indianisation ) शब्द का प्रयोग किया है इसलिए अलग से गलती को सुधारने की जरूरत नहीं है। इस पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर कहते हैं,
”मेरे कथन का अर्थ स्पष्ट है, मैं यह कहना चाहता हूं कि सभी जातियों के लोगों द्वारा नौकरियां पाई जा सकें, इसी तरह भारतीयकरण हो। आज भी भारतीयकरण को कुछ जातियों का एकाधिकार यही अर्थ प्राप्त है।“