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भारत का सुरक्षा विशिष्ट जातियों तक सीमित न होकर सभी जनता
के लिए हो
16 जनवरी, 1931 के दिन गोलमेज सम्मेलन में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का
भाषण हुआ। अपने भाषण में उन्होंने कहा-
महोदय,
इस रिपोर्ट के दूसरे उपविभाग के चौथे परिच्छेद में दिए गए संविधान सुधार के
सुझाव की तरफ मैं आपका ध्यान खींचना चाहता हूं। इस सुझाव के अनुसार भारतीय
सेना में दलित वर्ग के साथ-साथ सभी नागरिकों के दाखिल होने की इजाजत
होने की बात कही गई है। सेना में भर्ती के समय केवल आवश्यक योग्यता और
कार्यक्षमता पर ही ध्यान दिया जाए। मेरे इस सुझाव पर गौर किया जाए। केवल
यही मैं नहीं चाहता बल्कि एक बुनियादी ढंग के संविधान सुधार का यह सुझाव
है। यह सोच कर इस सभा द्वारा उसे प्रत्यक्ष लागू करने पर सोचा जाए यह भी मैं
चाहता हूं। मैंने जो सुझाव दिया है उसका स्वरूप बिल्कुल सीधा-सादा है। सेना
में भर्ती करते समय भारतीय नागरिकों के बीच जो भेदभाव आज बरता जाता है
उसे नष्ट करने की यह मेरी कोशिश है। इसमें कोई शक नहीं कि, दलित वर्ग पर
विशिष्ट हकों का आरक्षण हो इस नजरिए से ही मैं इस सुधार का सुझाव दे रहा हूं
लेकिन ऐसा भी नहीं कि यह करते हुए मैं इस वर्ग के लिए परिषद द्वारा कुछ खास
सिफारिशें करने की वकालत कर रहा हूं। यहां, मेरा बस इतना ही कहना है कि
भारतीय सरकार के कानून द्वारा स्वीकृत तत्वों को प्रत्यक्ष में लाया जाए। भारतीय
संविधान में प्रावधान है कि देश के किसी भी नागरिक को जाति, पंथ, धर्म अथवा
वर्ण के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरी पाने से वंचित न किया जाए। इसीलिए,
मैं जब इस तरह के सुधार का सुझाव रखता हूं तब मुझे नहीं लगता कि मैं खास
सुविधाएं या सहूलियतों की मांग कर रहा हूं।
महोदय, मैं आपका ध्यान एक बात की ओर दिलाना चाहता हूं, कि ये सुधार
सर्विस कमेटी द्वारा स्वीकृत नीति के अनुसार ही हैं। इस परिषद द्वारा नियुक्त की
गई सर्विस समिति की रिपोर्ट के संदर्भ पर अगर आप गौर करें तो भारतीय नागरिकों
को सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरी करने की न्यायपूर्ण और पूरा-पूरा मौका प्राप्त हो।
आप पाएंगे कि, इसके लिए उस कमेटी द्वारा पूरी-पूरी कोशिश की गई है। सरकारी
नौकरी से वंचित रखने वाले बंधनों से सुरक्षा प्रदान कर समिति ने एक तरह से
* मूल अंग्रेजी भाषण के मराठी में किए गए अनुवाद पर आधारित हिंदी अनुवाद