44. लडाई अगर कांटे की हो तो भी उसे पार लगाने की जिम्मेदारी अपनेपन की भावना के साथ निभाए - अगस्त 1931 मुंबई - Page 278

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बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी ही। ऐसी आपात् स्थितियों में आपको अपना बल और अधिक बढाना चाहिए और अपनी लड़ाई आगे जारी रखिए। इस सिंहस्थ मेले में नासिक में जो सत्याग्रह होने वाला है वहां जाकर आर्थिक और मानव संसाधनों की मदद दीजिए। मंदिर प्रवेश के सत्याग्रह के साथ नासिक जिले ने बड़ी जिम्मेदारी निभाई है और इसीलिए उनकी पुकार का जवाब देते हुए, लड़ाई भले कितनी ही कठिन लगे, उससे निपटने की जिम्मेदारी अपनत्व के भाव से स्वीकार कीजिए। नासिक की तरह ही पुणे जिला भी पिछड़ा हुआ नहीं है ऐसा अब मुझे लगने लगा है। दो माह पूर्व पुणे जिला बहिष्कृत परिषद हुई थी। उसमें हुए कामकाज से लगता है कि जल्द ही उस जिले में जोश के साथ आंदोलन की शुरुआत होगी। इस परिषद को सफल बना कर मेरे मित्र रेवजीबुवा डोलस ने मुझे दिखा दिया है कि पुणे जिला किसी भी तरह की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है। अपने सहयोगियों के साथ वे इस आंदोलन को इसी तरह बरकरार रखें। समता सैनिक दल के अनुशासन पर मुझे गर्व महसूस होता है। मैं उनसे कहना चाहूंगा कि वे इस अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को कायम रखते हुए अपने कार्य करने के संकल्प को और अधिक करें। अनुशासन और संगठन कायम रखते हुए अपनी जिम्मेदारी आप मेरी गैर-हाजिरी में भी बेहतर तरीके से निभाते रहेंगे, ऐसी मैं उम्मीद करता हूं।“ इसके बाद उन्होंने अपना भाषण समाप्त किया।