46. देश की एकता के लिए संगठन जरूरी है - जनवरी 1932 मुंबई - Page 286

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हितचिंतक नेता हैं। गोलमेज परिषद में आपने जो अपूर्व कार्य किया है, उसके बारे में हमें धन्यता महसूस होती है़।“

डॉ. अम्बेडकर को अपने स्वागत से आनंद हुआ। स्वागत करने आए सभी को उन्होंने अंतःकरण से धन्यवाद दिया। शेठ शंकरराव परशा, रा. ब. सी. के. बोले, सेठ मणियार आदि अन्य समाज के नेताओं ने भी डॉक्टर साहब का स्वागत किया। अस्पृश्य समाज के डॉ. सोलंकी, एन. टी जाधव, श्री वनमाली, श्री संभाजी गायकवाड़, गुडेकर, चांदोरकर, श्री शिवराम जाधव, श्री. नेवरीकर, श्री. दिवाकर पगारे बंधु, जाधव, श्री. गणपतबुवा, श्री. वराले, पुणे के सुभेदार घाडगे, नासिक के श्री रणखांबे, गायकवाड़, काले, रोहम, बापूसाहब दाणी, श्री. पतितपावन आदि लोग हाजिर थे।

बेलार्ड पियर के सुबह के स्वागत समारोह में समता सैनिक दल ने विशेष काम किया है। दल के सर्वाधिकारी श्री वडवलकर और सचिव और उपाध्यक्ष श्री सालवे और श्री लोटेकर ने भी इस काम में काफी मेहनत की है। डॉ. अम्बेडकर का मौ. शौकत अली के साथ जुलूस में जाने का कार्यक्रम भले ऐन समय पर तय किया गया था, लेकिन बेहतर ढंग से पूरा हुआ। दोनों नेताओं और जुलूस के फोटो लेने के लिए मोल स्टेसन पर फोटोग्राफर्स की भीड़ जुट गई थी। अस्पृश्य और मुसलमान लोगों का यह संयुक्त जुलूस बेलार्ड पियर निकला और जी. पी. ओ. मार्ग से होता हुआ मार्केट, अब्दुल रहमान स्ट्रीट, पायधुणी मार्ग से होता हुआ भायखला रोड के खिलाफत ऑफिस तक आया। खिलाफत ऑफिस में डॉ. अम्बेडकर का सम्मानपूर्वक स्वागत करने के उपरान्त डॉ. अम्बेडकर मौ. शौकत अली से विदा लेकर परेल के लिए निकले। परेल तक कार में उनका जुलूस निकाला गया। करीब 10.30 बजे डॉ. अम्बेडकर परेल के अपने ऑफिस में आ पहुंचे।

परेल में अस्पृश्य समाज के लोग पहले से उनके स्वागत के लिए इकट्ठा हुए थे। उनके स्वागत को स्वीकार करने के बाद शाम सात बजे तक उन्होंने विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों से और नेताओं से मुलाकातें कीं।