268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विलायत में गोलमेज सम्मेलन के काम में मुसलमानों ने डॉ. अम्बेडकर की जो मदद की थी, उसके कारण मौ. शौकत अली का स्वागत भी उन्होंने किया। अस्पृश्य और मुसलमानों का यह संयुक्त स्वागत समारोह अभूतपूर्व कहें तो अत्युक्ति नहीं होगी।
अपने स्वागत के लिए जवाब देते हुए मौ शौकत अली ने कहा कि डॉ अम्बेडकर मेरे छोटे भाई की तरह हैं, और जब तक हर धर्म के, जाति के और पंथ के व्यक्ति इस तरह के भाईचारे का अनुभव नहीं करते तब तक सच्चे स्वराज की प्राप्ति नहीं हो सकती। इंसान पहले अपने काम के लिए हिम्मत बटोरे। इस नजरिए से देखें तो डॉ. अम्बेडकर ने विलायत में गोलमेज सम्मेलन में जो हिम्मत का काम किया है, वह वाकई काबिले तारीफ है। मुसलमान समाज हिम्मत से हिंदवी स्वराज की मदद कर रहा है। और इसीलिए सबको एक-दूसरे के साथ सहकारिता से पेश आना ही पड़ेगा। मौ. शौकत अली के भाषण के बाद डॉ. अम्बेडकर बोलने के लिए उठ खडे़ हुए। तब लोगों की तालियों की और जयध्वनि की आवाज गूंज रही थी। उनके गले में लगातार फूलमालाएं डाली जा रही थीं। कई बार तो डॉ. अम्बेडकर फूलमालाओं के बीच दब से जाते हुए दिखाई दे रहे थे। कुछ समय बाद यह गगनभेदी जयघोष रुका और डॉ. अम्बेडकर ने बोलने की शुरुआत की। पहले उन्होंने अपने स्वागत के लिए सबके प्रति आभार व्यक्त किया। फिर उन्होंने कहा,
”आज यहां इकट्ठा हुआ जमावड़ा एक तरह से अद्भुत है। आज तक स्वागत के हिंदुओं के और मुसलमानों के कार्यक्रम अलग-अलग हुआ करते थे। इससे विभिन्न समाजों की भिन्नता ध्यान में आने की संभावना हुआ करती थी। लेकिन आज हम यहां मन में एकता का, अपने हिंदी होने का भाव लेकर इकट्ठा हुए हैं। गोलमेज परिषद के बारे में यहां कुछ कहना नहीं है, यह तय है। लेकिन एक बात मैं जरूर कहना चाहूंगा। वहां मुसलमान प्रतिनिधियों ने बेहद अपनेपन की भावना से मेरी मदद की है। उनकी मदद न मिलती तो शायद सभी प्रतिनिधियों से संघर्ष करना मेरे लिए असंभव होता। गोलमेज परिषद के अन्य हिंदू प्रतिनिधियों में अस्पृश्यों बारे में जो स्पष्ट रूप से कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी, वह मुझे मुसलमान प्रतिनिधियों में दिखाई दी। उनके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए मुझे उनके प्रति हमेशा आदरभाव ही रखना होगा। भारत की एकता के लिए हम सबको संगठन के बल पर अपने कार्यक्रम की रूपरेखा बनानी होगी।“
इस स्वागत समारोह से पहले चमार समाज के मिस्टर पी. बालू, राजभोज, काजरोलकर, पवार आदि लोग डॉ. अम्बेडकर से जहाज पर मिले। फूलमालाएं पहनाकर, गुलदस्ते देकर उन्होंने डॉ. अम्बेडकर का सम्मान किया। उनका स्वागत करते हुए मिस्टर पी. बालू ने कहा, कि ‘डॉक्टर साहब, अस्पृश्य समाज के आप सच्चे