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स्वाभिमान और आजादी का दीप कभी ना बुझने दें
मुंबई और मुंबई इलाके की 114 संस्थाओं की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार, दिनांक 29 जनवरी, 1932 को शाम 7 बजे दामोदर हॉल मुंबई में डॉ. पी. जी. सोलंकी की अध्यक्षता में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र देने का समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में छोटी बच्चियों ने उनकी प्रशंसा में गीत गाए। स्वागत समारोह में हजारों महिलाओं और पुरुषों का समुदाय इकट्ठा हुआ था। बाद में अध्यक्ष श्री सोलंकी की सूचना के अनुसार श्री एन. टी. जाधव ने मानपत्र पढ़ कर सुनाया। इस मानपत्र पर मुंबई और मुंबई इलाके की कुल 114 संस्थाओं के हस्ताक्षर हैं। यह मानपत्र निम्नानुसार है,
मानपत्र का जवाब देते हुए डॉ. अम्बेडकर ने कहा-
”आज आपने मुझे जो मानपत्र दिया है, उसमें उल्लिखित गौरव के लिए मेरी कितनी योग्यता है इस बारे में साशंक हूं। किसी पड़ोसी को, या पास/नजदीक के व्यक्ति को उसके जितने दोष दिखाई देते हैं, उतने किसी दूर के व्यक्ति को दिखाई नहीं देते। गोलमेज परिषद में मैंने जो काम किया, उसकी सफलता का श्रेय मेरी झोली में डालने की कोशिश इस मानपत्र में गौरवपूर्ण शब्दों के सहारे की है। लेकिन मेरी मनोवेदना मुझे बताती है कि गोलमेज सम्मेलन में हुए काम की सफलता का केवल मैं भागीदार नहीं हूं। उस सफलता के धनी यहां इस समय इकट्ठा हुए मेरे अनगिनत भाई-बहन ही हैं। हम सबको एक बात पूरी तरह ध्यान में रखनी चाहिए कि किसी भी समाज का या पक्ष का नेता किसी सुयश का अकेला हकदार कभी नहीं बन सकता। केवल नेता का पद होना काफी नहीं है, हम जिस कार्य के लिए आगे आए हैं, वह इंसानियत के अधिकारों का अपना पवित्र कार्य कडे़ स्वार्थत्याग से और अनुशासन के साथ किया जाना चाहिए। गोलमेज परिषद के लिए आपकी ओर से मैं प्रतिनिधि नियुक्त तो हुआ, लेकिन अगर आप खुद अपने काम की जरूरत को जान कर मेरी कोशिशों को एकमत से और एकजुट से समर्थन नहीं देते तो मैं शायद कुछ नहीं कर पाता। राउंड टेबल परिषद के बहाने ही सही भारत के समस्त अस्पृश्य वर्ग में जागृति का दावानल भड़क उठता और जागृति की यह ज्योति अपने उज्जवल स्वरूप के साथ ब्रिटिशों को, वहां के राजनीति के धुरंधरों को दिखाई नहीं
* जनता : 30 जनवरी, 1932
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को समर्पित मानपत्र : संपादक : शंकरराव हातोले प.ृ 29-33 (इस मानपत्र पर तारीख नहीं है। लेकिन 114 संस्थाओं की ओर से मानपत्र और गोलमेज सम्मेलन का जिक्र इन बातों को ध्यान में लेते हुए वह ऊपर बताए कार्यक्रम में दिया गया हो। -संपादक)