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- सभी मंत्रि मंडलों में मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यकों को ज्यादा से ज्यादा
शामिल करने की परिपाटी शुरू करें।
- अल्पसंख्यक जातियों के हितों की रक्षा के लिए और उनकी उन्नति के लिए
केंद्रीय और प्रादेशिक विभागों की स्थापना की जाए।
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अलग चुनाव क्षेत्र का अधिकार
- फिलहाल संविधान सभा में प्रतिनिधित्व का अधिकार रखने वाली अल्पसंख्यक
जातियों के लिए हर संविधान सभा में स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र हो और उन्हें आगे दिए
जा रहे परिशिष्ट के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाए। किंतु किसी भी बहुसंख्यक
जाति को अन्य जातियों की तुलना में अल्पसंख्यक अथवा समबल न बनाया
जाए।
- केंद्रीय और राज्य लोकसेवा आयोग की स्थापना की जाए और उनके जरिए
विभिन्न जातियों के लायक तथा काम के लिए योग्य लोगों की सही अनुपात में
अलग-अलग विभागों में भर्ती की जाए। इस तत्त्व पर अमल करने का सुझाव
गवर्नर जनरल एवं गवर्नर को दिया जाए और समय-समय पर इन सेवाभर्तियों
की जांच की जाए।
- किसी जाति की धार्मिक और सामाजिक रीतियों के संदर्भ में बने बिल का
संविधान सभा में शामिल उस जाति के दो तिहाई सदस्य विरोध करें तो उस
बिल के अमल को स्थगित किया जाए । एक साल के बाद भी उक्त बिल में
जाति संबंधित विरोध को अमान्य कर बदलाव लाने से अगर संविधान सभा
इनकार करती है, तो उस बिल को मंजूरी देने अथवा न देने का अधिकार
गवर्नर जनरल को हो। ऐसे बिल के कानूनी पक्ष को लेकर उस जाति के दो
सदस्य उच्चतम न्यायालय में फरियाद कर सकते हैं।
विभिन्न जातियों को मिलने वाले प्रतिनिधियों की संख्या
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भारत की वरिष्ठ एवं कनिष्ठ संविधान सभा में अलग-अलग जाति के कितने प्रतिनिधि हों इस बारे में मसौदे में यह परिशिष्ट नत्थी किया गया था- ख्1,
- अम्बेडकर-गांधीः तीन मुलाकातेंः रत्नाकर गणवीर, पृ. 19-21