56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 330

313 सेकंड चेंबर का विचार

(19) प्रांत के विधिमंडल में सेकेंड चेंबर के होने के बारे में अब तक बहुत कम विचार-विमर्श हुआ है। किन प्रांतों में सेकेंड चेंबर की जरूरत है, इस पर विचार किया जाना बाकी है। हालांकि, सरकार को लगता है कि सेकेंड चेंबर की स्थापना करते वक्त भी लोअर चेंबर में जाति के अनुपात के संतुलन में किसी तरह का व्यवधान न आने पाए, इसका खयाल रखना होगा। केंद्रीय विधिमंडल

(20) केंद्रीय विधिमंडल के संविधान के बारे में सोचते हुए संस्थाओं के तथा अन्य कई मुद्दे उभरते हैं। हालांकि उन पर अभी सोचने का सरकार का इरादा नहीं है। आगे जब कभी इस पर विचार किया जाएगा, तब उसमें हर जाति को योग्य प्रतिनिधित्व मिले इसका सरकार खयाल रखेगी।

(21) सिंध प्रांत को स्वतंत्रता मिले, इस बात को सरकार ने सिद्धांततः स्वीकार किया है। हालांकि आर्थिक दृष्टि से उस पर विचार मंथन अभी बाकी है, इसलिए विधिमंडल सदस्यों के आंकडे़ देते वक्त मुंबई प्रांत और सिंध प्रांत के आंकडे़ अलग-अलग दिए गए हैं। और सिंध के साथ मुंबई प्रांत के आंकडे़ भी दिए गए हैं।

(22) बिहार, उड़ीसा के आंकडे़ अभी के हैं और उड़ीसा को आजाद करने का मुद्दा अभी विचाराधीन है।

(23) धारा 24 के अंतर्गत मध्यप्रांत और वर्हाड के आंकडे़ एक साथ दिए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वर्हाड के भविष्यकालीन संविधान के बारे में नीति तय की गई है।

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अलग-अलग प्रांतों की जगहों का बंटवारा

(24) प्रांतिक विधिमंडलों में निम्नानुसार जगहों का बंटवारा किया जाएगा -

विभिन्न वर्ग (1) मद्रास प्रांत (2) मुंबई और सिंध प्रांत (3) बंगाल प्रांत (4) संयुक्त प्रांत (5) पंजाब प्रांत (6)

  1. सामान्य 128 92 78 128 42

महिला प्रतिनिधि 6 5 2 4 1 2. अस्पृश्य 18 10 .. 12 3. पिछडे़ 1 1 ... ... ... 4. मुसलमान 20 62 117 64 84

महिला प्रतिनिधि 1 1 2 2 2