312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(12) पिछड़ी जातियों को दी जाने वाली जगहों का मसला अभी विचाराधीन होने के कारण अब ऐसे विभागों के लिए दी जा रही जगहें तात्कालिक समझी जाएं। महिलाओं के प्रतिनिधि
(13) विधिमंडल में स्त्रियों का भी प्रतिनिधित्व हो, इस बात को ब्रिटिश सरकार बहुत महत्व दे रही है और ऐसा तभी संभव हो सकता है, जब कुछ जगहें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि सभी महिला प्रतिनिधि, एक ही जाति की न हों। किन्तु इस भय को नष्ट करने का कोई ठोस उपाय अभी सरकार को मिला नहीं है। इसलिए महिला प्रतिनिधियों की जगह हर जाति के लिए एक इस रूप में सीमित की गई हैं। इसके लिए जो अपवाद हैं उन्हें धारा 24 में दर्ज किया गया है। इस तरह महिलाओं की खास जगहें विभिन्न जातियों में बांटी गई हैं। हालांकि, उनके चुनाव की विधि के बारे में अभी विचार-विमर्श चल रहा है।
(14) श्रमिक वर्ग के प्रतिनिधि उन चुनाव क्षेत्रों से चुने जाएंगे, जो किसी विशिष्ट जाति के लिए आरक्षित न किए गए हों। चुनाव का मार्ग अभी तय होना बाकी है। लेकिन कहीं-कहीं श्रमिकों के प्रतिनिधि ट्रेड यूनियनों से चुन कर आएंगे तथा कुछ जगह मतदाता कमेटी की सिफारिशों के अनुसार विशिष्ट चुनाव क्षेत्रों से चुन कर आएंगे।
(15) व्यापार, उद्योग, खदान और बागानों को दी गई जगहों पर चेंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य संस्थाओं के माध्यम से चुनाव होंगे। हालांकि, अभी इस योजना पर विस्तार से विचार होना बाकी है।
(16) जमींदारों के लिए खास चुनाव क्षेत्रों से चुनाव होंगे।
(17) विश्वविद्यालयों की जगहों के चुनावों के बारे में अभी विचार-विमर्श जारी है। बदलाव करने का हक
(18) ऊपर बताए गए बिंदुओं पर सोचते हुए उनसे संबंधित छोटे-छोटे मसलों पर भी सरकार को सोचना पड़ रहा है। इसके बावजूद चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं तय करना बाकी है और जहां तक संभव हो हिंदुस्तान में ही जितनी जल्दी हो सके इस मसले पर विचार किया जाए।
कुछ मामलों में चुनाव क्षेत्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जगहों की संख्या में बदलाव करना आवश्यक हो तो सरकार ने ऐसा बदलाव करने का हक अपने पास सुरक्षित रखा है। इस तरह के बदलाव करते वक्त जातियों के संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। बंगाल और पंजाब के बारे में कोई बदलाव नहीं किए जाएंगे।