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बंगाल प्रांत के अस्पृश्य प्रतिनिधियों की संख्या बाद में सूचित की जाएगी। इसके अलावा जिन प्रांतों को स्वतंत्र उम्मीदवारों के अतिरिक्त चुनाव क्षेत्र दिए जाएंगे उनके नाम भी जाति से संबंधित सवालों के इस निर्णय में नहीं दिए गए हैं। हालांकि जल्द ही उन प्रांतों के नाम घोषित किए जाएंगे। जिन प्रांतों में अस्पृश्य वर्ग की जनसंख्या अधिक है उन प्रांतों में अधिक दिए जाएंगे। ख्1,
इस निर्णय की घोषणा किए जाने के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री रॅम्से मैकडोनाल्ड ने जो विस्तृत विवरण दिया था वह इस प्रकार है -
”ब्रिटिश सरकार की ओर से आज मैंने जिस जाति से संबंधित सवालों को लेकर निर्णय घोषित किया है उसके बारे में प्रधानमंत्री की हैसियत से नहीं, वरन पिछले दो सालों से आपके निकट सान्निध्य में जो दोस्ती पनपी है, उस दोस्ती से प्रेरणा लेकर थोड़ा स्पष्टीकरण दे रहा हूं।
हिंदुस्तान के जाति संबंधी सवालों को लेकर हमें दखलंदाजी करने की जरूरत नहीं थी। पिछले गोलमेज सम्मेलन के समय हमने जानबूझ कर कहा है कि इस प्रश्न को आप लोग ही आपस में हल करें। हम अच्छी तरह जानते हैं कि जाति के इस सवाल का हम चाहे जिस तरह हल करें हर जाति को यह शिकायत रहेगी कि उनकी सभी मांगें नहीं मानी गईं। इसके बावजूद हिंदू संविधान बेखटके सफल हो इसके लिए हर समाज को कुछ सुविधाजनक मार्ग स्वीकारने पडें़गे और एकजुट होकर इस नए संविधान पर अमल करना होगा। इस प्रकार अगर अपने कर्त्तव्य के बारे में सब जागरुक रहें तो हिंदुस्तान को ब्रिटिश उपनिवेशों के संविधान में नया स्थान प्राप्त होगा।
हमारा कर्त्तव्य जग-जाहिर है। जाति से संबंधित मसलों के बारे में समाज में अगर एकमत नहीं हुआ, नए संविधान के लिए संकट पैदा होने जैसी स्थितियां पैदा हुईं तो सरकार को कड़े उपाय लागू करने पडें़गे। इसीलिए, हमने जो पहले वचन दिया था उसके अनुसार तथा पिछले दोनों गोलमेज सम्मेलनों के दौरान हिंदुस्तान की अलग-अलग जातियों के प्रतिनिधियों द्वारा की गई विनती के अनुसार तथा ब्रिटिश सरकार द्वारा इससे पूर्व किए खुलासे के अनुसार आज हम जाहिर कर रहे हैं कि हिंदू प्रांत के विधिमंडल में विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों की संख्या कितनी होनी चाहिए। हमारे इस निर्णय को समाज के सभी वर्गों द्वारा जांचा जाए और संसद में नया बिल प्रस्तुत करने से पहले अपनी सुलह की राय प्रस्तुत करें।
संसद के आगे पेश करने और इस योजना को कानून का रूप प्राप्त होने से पहले सभी भारतीय प्रतिनिधियों के अनुमोदन से बनी कोई योजना अगर इस बीच तैयार
- जनता : 27 अगस्त, 1932