470 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय ”अखिल मुंबई इलाका महार परिषद, मुंबई“
अपूर्व एवं सफल अधिवेशन
सामुदायिक धर्म परिवर्तन को समर्थन
मुंबई इलाका महार परिषद का अधिवेशन दिनांक 30 मई, 1936 के दिन हैदराबाद संस्थान के प्रसिद्ध नेता श्री. बी. एस. वेंकटराव की अध्यक्षता में बड़ी धूमधाम से शुरू हुआ। इस परिषद के लिए दादर-नायगाव नुक्कड़ पर स्थित विस्तीर्ण मैदान पर 50 हजार से अधिक लोग आराम से बैठ सकें, इतना विशाल मंडप खड़ा किया गया था। इस विस्तीर्ण मंडप में महाड़ दरवाजा, नासिक दरवाजा और रमाबाई अम्बेडकर दरवाजा नाम से तीन बडे़ दरवाजे बनाए गए थे। मंडप का नामकरण रमाबाई नगर किया गया था। मंडप में कुछ सूक्तियों वाली तख्तियां टंगी थीं जिन पर आगे दी जा रही सूक्तियों जैसी घोषणाएं लिखी हुई थीं -
Û इंसानियत पाना चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन करें। संगठन बनाना चाहते हों तो
धर्म परिवर्तन करें।
Û सामर्थ्य प्राप्त करना चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन करें।
Û समता प्राप्त करना चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन करें।
Û स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन करें।
Û गृहस्थी को सुखकारी बनाना चाहते हैं तो धर्म परिवर्तन करें। Û जो धर्म आपके अंदर के इंसान का सम्मान नहीं करता, उस धर्म में आप क्यों
रहते हैं?
Û जो धर्म आपको मंदिर में प्रवेश नहीं देता, उस धर्म में आप क्यों रहते हैं? Û जो धर्म आपको पानी मिलने नहीं देता, उस धर्म में आप क्यों रहते हैं? Û जो धर्म आपको शिक्षा लेने नहीं देता, उस धर्म में आप क्यों रहते हैं? Û जो धर्म पग-पग पर आपकी मानहानि करता है, उस धर्म में आप क्यों रहते हैं? Û जो धर्म आपकी नौकरी के आडे़ आता है, उस धर्म में आप क्यों रहते हैं? Û जिस धर्म में इंसान के साथ इंसानियत से पेश आना मना है वह धर्म नहीं
बरजोरी (जुल्म, जबरदस्ती) की सजावट है।
Û जिस धर्म में इंसान की इंसानियत पहचानना अधर्म माना जाता है, वह धर्म नहीं
वह तो रोग है।
Û जिस धर्म में अमंगल पशु का स्पर्श हो तो चलता है, लेकिन इंसान का स्पर्श
नहीं चलता वह धर्म नहीं पागलपन है।
Û जो धर्म बताता है कि समाज का एक वर्ग विद्या न प्राप्त करे, धनसंचय न करें, Û शस्त्रधारण न करें, वह धर्म नहीं इंसान के जीवन का विडंबन है।