96. जिस पेड़ की छांव में सुखपूर्वक बसना है, उसकी डालें तोड़ने की क्रूरता ना करे - नवंबर, 1936 मुंबई - Page 561

544 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

काँग्रेस तथा अन्य कई हितशत्रू कई तरह की षड्यंत्र रच कर, उनकी राह में अटा मेरा कांटा निकाल फेंकने की कोशिश में लगे हुए हैं। मुझे यकीन है कि चुनाव के हर वार्ड के मतदाता मुझे मत दिए बगैर नहीं रह सकते। यह काम समता सैनिक दल को प्रत्यक्ष रूप से हाथ में लेकर ही करना होगा। मुझे पक्का यकीन है कि मेरी गैरहाजिरी में यह बृहŸार जिम्मेदारी समता सैनिक दल का हर अनुशासित सैनिक ईमानदारी से निभाएगा। इस काम के लिए मैंने एक कमेटी की नियुक्ति की है। उसकी मदद से आप अपना कर्त्तव्य निभा सकते हैं।“

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