96. जिस पेड़ की छांव में सुखपूर्वक बसना है, उसकी डालें तोड़ने की क्रूरता ना करे - नवंबर, 1936 मुंबई - Page 560

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गोद में जा बैठेंगे! श्री. पी. बालू, वल्लभभाई की गोद में दिखाई देंगे!! ऐसे ही हालात रहे तो आखिर इस पार्टी का क्या हाल होगा कहा नहीं जा सकता। इस वास्तविक स्थिति पर क्या कभी किसी ने कुछ कहा है? हमारी पार्टी के साथ आज तक जिसने सहयोग किया और हमारे कार्य के लिए जो हमेशा कोशिश करते रहे, वे श्री शिवतरकर मास्टर चमार समाज के प्रमुख हैं। दुर्भाग्य से उन्हें महापालिका कमेटी ने विधिमंडल चुनाव मे खडे़ रहने की इजाजत नहीं दी। इसीलिए उन्हें हमारी पार्टी की तरफ से उम्मीदवारी नहीं दी जा सकी। खैर...

सच पूछिए तो मुझे इस विधिमंडल में जाने से अधिक विधिमंडल के बाहर रह कर ही काम करना ज्यादा अच्छा लगता है। मेरे सामने आज धर्म परिवर्तन का सवाल है, नए कॉलेज की चिंता है, और कई अन्य सार्वजनिक काम हैं। इसके बावजूद आप सब लोगों की खातिर मैं इस नई पार्टी के साथ विधिमंडल में प्रवेश करने का संकल्प ले चुका हूं। मेरे इस संकल्प की राह में कांटे बोए बगैर काँग्रेस नहीं रहेगी, यह मैं जानता हूं। पैसों के बल पर मेरा विरोध करने के लिए काँग्रेस कई तरह की कोशिशें करेगी। अभी से वे ऐसी कोशिशों में लगे हुए हैं। इसलिए हम सभी को अनुशासनपूर्वक संगठित रहना होगा। आप सबके मत इस बार मुझे मिलने चाहिए। चुनाव जीतने के लिए मैं अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा, यह आप लोगों को ध्यान में रखना होगा। हमारी मदद के लिए कोई नहीं आएगा और ऐसे समय आप किसी षड्यंत्र का शिकार न हों। जिन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया, ऐसे कुछ असंतुष्ट लोग चालबाजी में लगे हुए हैं। स्वाभिमान की खातिर ही सही उनकी षड्यंत्र का शिकार ना होइए। मुझे यकीन है कि, जिस पेड़ की छांव में सुखपूर्वक बसेंगे, जिसकी छांव में हमें पूरा संतोष मिलने वाला है, उसकी छांव नष्ट करने की, छांव देने वाली उसकी शाखाएं कुल्हाड़ी से तोड़ देने की क्रूरता आप नहीं करेंगे। जो लोगों के भड़कावे में आकर, अपने स्वार्थ से, अविचार और दुष्टता के काम करने के लिए प्रेरित हुए हैं, उन्हें उनके उद्देश्यों में कितनी सफलता मिलेगी यह कहा नहीं जा सकता। एक बात पक्के तौर पर कही जा सकती है कि वे अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। इन सभी तरह की कार्रवाइयों से अलग रहते हुए मैं अपने सहयोगियों के साथ जो कार्यक्रम आपके सामने रखने जा रहा हूं, उसका आप तथा समता सैनिक दल के हर सैनिक को अनुशासन के साथ पालन करना होगा।

हमें कई बलाढ्य शत्रुओं का सामना करना है। उसके लिए इस मुंबई शहर में कम से कम 2000 समता सैनिकों को तैयार करना होगा। हमारे पास अगर काफी मानव संसाधन हो, तो अनुशासन और संगठन के बल पर हमारे लिए अत्यंत कठिन परिस्थितियों से भी राह निकालना कभी मुश्किल नहीं होगा। मेरे चुनाव के बारे में