118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 109

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अध्यक्ष पद ग्रहण करने के बाद डॉ. बाबासाहेब ने छोटा-सा भाषण दिया जिसमें उन्होंने परिषद की पृष्ठभूमि के बारे में बताया। फिर लोगों से निवेदन किया कि परिषद के आयोजकों ने मुझे परिषद के कार्य की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, जिसका सफलतापूर्वक निर्वहन करने के लिए आप सभी के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि, आज यहां हजारों कामगार अपना दुःख प्रकट करने के लिए निडरता से उपस्थित हुए हैं, यह देखकर मुझे खुशी हो रही है। उन्होंने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि, आपके सुख-दुःखों के बारे में सोच-विचार कर, आपकी उत्साह स्थिति से आपको बाहर निकालने के लिए कौन-से उपाय किए जा सकते हैं, इस बारे में दूसरे दिन अध्यक्ष के नाते अपने विचार प्रकट करूंगा। इस परिषद में उपस्थित अन्य महत्त्वपूर्ण आमंत्रितों में श्री देवराव नाईक, कमलकांत चित्रे, द. वि. प्रधान, आर. डी. कवली, भा. र. कडेकर, नागपुर के मि. हरदास, (एमएलए), डॉ. एस.सी. जोशी, भाऊराव कृष्णराव गायकवाड, भंगी समाज के नेता श्री रामा शिवा पाला, ठाणे के शिवराम गो. जाधव, विट्ठलराव रणखांबे, गणपतराव जिले, युवक परिषद के स्वागताध्यक्ष मुरलीधर पगारे, मनमाड के पूर्व कैंसिलर रामाभाऊ जमधाडे के साथ अन्य प्रांतों से आए महत्त्वपूर्ण लोग भी उपस्थित थे।

रविवार की सुबह विषयों का नियोजन करने वाली समिति का कामकाज पूरा होने के बाद परिषद के दूसरे दिन का कामकाज शुरू हुआ। आज परिषद में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण होना था। परिषद के कामकाज की शुरूआत थोड़ी देर से ही हुई। दलित कामगार नगर में धूप आने लगी थी इसके बावजूद लोगों का भाषण सुनने के लिए विशाल जन-समुदाय उपस्थित था। पहले कुछ मामूली कार्यक्रम और उसके बाद तालियों की गड़गड़ाहट में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठकर खड़े हुए। ख्5,

उन्होंने अपने भाषण में कहा,

‘‘मित्रो, जी. आई. पी. रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों की यह परिषद है। इससे पूर्व इस प्रदेश में तथा अन्य जगहों पर भी दलित वर्ग की कई परिषदें हुई हैं। उस तरह से देखा जाए तो यहां होने वाली यह पहली परिषद नहीं है। लेकिन अलग अर्थों में अगर देखा जाए तो यह इस प्रकार की पहली ही परिषद है। इससे पहले सामाजिक अन्याय के निवारण के लिए दलित वर्ग तत्वतः लड़ता आया है। अपनी आर्थिक शिकायतों के संदर्भ में दलित वर्ग इस परिषद के द्वारा पहली बार इक्ट्ठा हो रहा है। आज पहली बार आप श्रमिक के नाते एकजुट हो रहे हैं। आज तक हमने अपना ध्यान सामाजिक शिकायतें दूर करने पर केन्द्रित रखा, मैं यह नहीं कहता कि इसमें हमसे कोई भूल हुई है। अन्य लोग भले कुछ कहें लेकिन वास्तव में ये सामाजिक अन्याय हमारी इंसनियत को मसलने वाले पाटे हैं। यह नहीं कहा जा सकता है कि आज तक के हमारे संघर्ष के कोई फल

जनताः 5 फरवरी, 1938