118 12/13.2.1938 आजादी, समता, बंधुभाव पर आधारित नई पद्धति श्रमिक संगठनों का लक्ष्य हो - मानमाड़ - Page 108

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अस्पृश्य कामगार परिषद का अधिवेशन फरवरी, 1938 के 12 और 13 तारीख के शनिवार और रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। परिषद के लिए बनाए गए ‘दलित-कामगार नगर’ की सजावट बेहतरीन थी। परिषद के आयोजकों ने कम से कम 20,000 लोग आराम से बैठ सकें ऐसा प्रबंध किया था। साथ ही परिषद के भाषण सभी सुन सकें इसलिए ‘लाऊड स्पीकर का विशेष प्रबंध किया गया था। अध्यक्ष एवं कर्मचारियों के लिए छोटा-सा मंच बनाया गया था। उस पर कई प्रमुख कार्यकर्त्ताओं के फोटो तथा डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की भव्य तस्वीर फूलमालाओं से सजाकर लगाई गई थी। मंच के दाहिनी ओर महिलाओं के लिए विशेष प्रबंध किया गया था। साथ ही मंच के आस-पास स्वागत मंडल के प्रतिनिधि और आमंत्रित मेहमानों का प्रबंध किया गया था। शनिवार की शाम परिषद के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का अपने परिचितों के साथ आगमन हुआ। ‘दलित कामगार नगर में बैंड की मधुर ध्वनि और उनकी जयकार की ध्वनि के मिले-जुले स्वरों के साथ लोगों ने प्रेम और अपनत्व से उनका स्वागत किया। मंच पर उनके लिए निर्धारित जगह पर जाकर बैठने तक ‘डॉ. अम्बेडकर की जय’, ‘डॉ. अम्बेडकर जिंदाबाद’, ‘श्रमिकों की जय हो।’ जैसे जयकारों से वातावरण गूंजता रहा था। उसके बाद छोटे बच्चों ने मधुर ध्वनि में स्वागत पद और अभिनंदन गीत गाए। इसके लिए श्री शंकरराव सालवे ने काफी मेहनत की थी। परिषद के कामकाज की शुरूआत से पहले ही ‘दलित कामगार नगर’ महिलाओं और पुरुषों की भीड़ से खचाखच भरा हुआ था। नगर की सजावट पताकाओं से की गई थी जो बहुत ही सुन्दर लग रही थी। कामगार नगर में फिर शांति उत्पन्न होते ही स्वागताध्यक्ष श्री पी. एन. बनकर ने अपना भाषण पढ़कर सुनाया। उनके भाषण के बाद परिषद के उत्साही महासचिव श्री रामचंद्रराव पवार ने परिषद के कामकाज की जानकारी दी। आमंत्रितों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। परिषद के लिए आए संदेश पढ़कर सुनाए। अस्पृश्य समाज के प्रमुख नेता मे. सुबेदार विश्राम गंगाराम संवादकर का संदेश अस्पृश्य कामगारों को उनके कर्त्तव्यों का अहसास कराने वाला होने के कारण महत्त्वपूर्ण था। इसके अलावा उत्तर रत्नागिरी के पृथक मजदूर पक्ष की शाखा के अध्यक्ष तथा श्रमिकों के नेता भाई अनंत चित्रे का महाड से संदेश आया था। अपने संदेश में उन्होंने रत्नागिरी के उत्तरी इलाके के किसानों की ओर से परिषद के लिए सफलता की कामना की थी। साथ ही इस परिषद का अध्यक्ष स्थान डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा स्वाकरे जाने के लिए अत्यानंद प्रकट किया है। उनके अतुलनीय पराक्रमी और सुयोग्य नेतृत्व में श्रमिकों के आंदोलन का निश्चित रूप से भाग्योदय होगा, इसके लिए हम सभी को जोशपूर्ण संगठन बना कर प्रत्यक्ष रूप से काम में लग जाना चाहिए आदि बातें भी उन्होंने अपने संदेश में कही थी। इनके अलावा अन्य शुभ संदेश पढ़ने के बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को विधिवत अध्यक्ष के पद के लिए चुना गया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने अध्यक्ष स्थान स्वीकारा। उन्हें पुष्पहार अर्पण किया गया।