165 26.12.1939 अन्याय करनेवालों को स्वराज मांगने का
कोई अधिकार नहीं 257 166 26.12.1939 स्वराज आपका और राज हम पर! 258 167 30.12.1939 जनतांत्रिक प्रणाली से हिंदुस्तान को परहेज क्यों? 262 168 30.12.1939 शाहू छत्रपति ने ब्राह्मण्य का किला ढहा दिया 267 169 31.12.1939 मेरे बाद भी अपनी एकजुटता कायम रखना 271 170 2.1.1940 युद्ध के बाद हिंदुस्तान के सामने बड़ी-बड़ी
समस्याएं उपस्थित होंगी 272 171 3.1.1940 महारों की कापफी जमीन और महारों की बस्ती
गुलामी की ही निशानियां हैं 274 172 28.1.1940 सेना में भर्ती होकर सम्मान के पद हासिल करो 277 173 4.2.1940 देश हित के लिए निजी हित त्यागने को मैं तैयार हूं 278 174 19.3.1940 राजनीतिक आजादी पाते ही जनता का कल्याण
होगा यह भ्रम है 281 175 19.3.1940 मेरी राय में व्यवहार कुशलता और चारित्रिक
संपन्नता ये दो महाराष्ट्रीय लोगों के गुण हैं 292 176 14.7.1940 छापाखाना और ‘जनता’ पत्रिका स्वतंत्र लेबर
पार्टी के सहारे बढ़ रहे वृक्ष की जड़ें हैं 296 177 28.7.1940 निश्चय और निष्ठा के साथ चुपचाप कार्य
करने वाले कार्यकर्त्ता चाहिए 297 178 26.8.1940 आंदोलन का प्रभावी साधन हैं अखबार 299 179 22.9.1940 दूरदृष्टि और बचत इन दो गुणों को भावी पीढी़ संजाए 301 180 10.10.1940 अस्पृश्यों से प्राप्त धन से ही आंदोलन के
लिए भव्य इमारत बनाइए 302 181 1.11.1940 ...तो गांवों के अन्याय पीडि़त लोगों की
मदद की जा सकती है 303 182 23.11.1940 सार्वजनिक कामों के लिए एका जरूरी 306 183 24.11.1940 अभी कोंपलें निकली हैं, यह संकेत है कि पफल आएंगे 309