97
* ये पद सम्मान के नहीं, कुछ कर दिखाने के हैं
अस्पृश्यों के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का विलायत से आगमन होते ही उन्होंने स्वतंत्र लेबर पक्ष के दौरे पर निकलने का कार्यक्रम रखा। पहलीखेप में उन्होंने नासिक जिले का दौरा करना तय किया। सभा आदि का आयोजन करने के लिए समय कम था। इसके बावजूद नासिक के धीर और जुझारू नेता भाऊराव गायकवाड ने डॉ. बाबासाहेब के दौरे का कार्यक्रम इतनी कुशलतापूर्वक बनाया कि जगह-जगह, सड़कों पर, पंचायत के दफतर में, गांव की सरहर पर हजारां महिलाएं और पुरुष डॉ. बाबासाहेब के इंतजार में उनके दर्शनों के लिए उत्सुकखड़े मिले।
शनिवार दिनांक 16 जनवरी, 1937 को नागपुर मेल से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर रात 8 बजे इगतपुरी पहुंचे। इगतपुरी के लोगों की तथा स्वावलंबन मंडल की ओर से वहां उन्हें फूलमालाएं अर्पण की गईं। रात 9 बजे डाकखाने के पास वाले मैदान में सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में दो हजार से अधिक जनसमुदाय हाजिर था। दूसरे दिन यानी रविवार दिनांक 17.1.1937 को पैसेंजर ट्रेन से सुबह सवा सात बजे कैंप देवताली आते समय इगतपुरी स्टेशनन पर उनके स्वागत के लिए इक्ट्ठे हुए जनसमुदाय की ओर से डॉ. बाहासाहेब अम्बेडकर के फूलमालाएं अर्पण की गईं। ‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जय’ नारे की गूंज के साथ ट्रेन इगतपुरी स्टेशन से निकली। उस वक्त डॉ. बाबासाहेब के साथ नासिक के उम्मीदवार श्री भाऊराव कृष्णराव गायकवाड, पूर्वखानदेश के उम्मीदवार श्री दौलतराव जाधव, नगर के उम्मीदवार श्री प्रभाकर जनार्दन रोहम, नासिक जिला युवक संघ के जलसा मंडल में से देवराव डांगले, भीमराव कडक, बालाजी आदि लोग थे। नासिक रोड़ पर और इगतपुरी में स्काऊट मंडल ने शंति और व्यवस्था कायम रखने का काम बेहतरीन ढंग से किया। आगे घाटी, आसवली, लहवीत स्टेशनों पर लोगों ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमालाएं पहनाईं। देवलाती कैंप स्टेशन पर लोगों की बड़ी भीड़ जुटी थी। यहां भी कई संस्थाओं की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमालाएं पहनाई गईं। तेलखोरा और नासिक रोड के स्काऊट की ओर से स्टेशन के बाहर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। फिर स्टेशन से कैंप देवलाती के ज्ञान मंदिर तक प्रमुख सड़कों से जलूस निकाला गया। आगे मातंगों का बैंड बज रहा था। ‘डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जय’, ’अम्बेडकर की जयजयकार’, ‘‘अम्बेडकर कौन है ’’ दलितों का राजा है।’’ ‘‘तरुण
* जनताः 23 और 30 जनवरी 1937