194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 375

354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राव बहादुर शिवराज ने अपने भाषण में अस्पृश्यों के राजनीतिक अधिकारों के बारे में किए आंदोलन का संक्षेप में इतिहास बताया और काँग्रेस, हिंदू और सरकार द्वारा समय-समय पर अपनाई गई नीति के लिए उन्हें दोषी करार दिया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा क्रिप्स के साथ जो लेन-देन की बातचीत की उसमें क्रिप्स साहब ने जो विरोधी नीति अपनाई उसका इतिहास संक्षेप में बता कर शिवराज ने विक्रम साहब की खूब आलोचना की। पुणे करार के कारण काँग्रेस को अस्पृश्यों के राजनीतिक अधिकारों पर मन मर्जी से आक्रमण करने का मौका मिला। इस मुद्दे पर उन्होंने मिसालें देते हुए भाषण किया और मांग की कि पुणे करार में योग्य फेर-बदलाव करें या उस करार को रद्द करें।

अस्पृश्यों की ओर से बाबासाहेब को मंडप में मानपत्र दिया गया। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने मानपत्र का जवाब देते हुए जो भाषण किया उसमें विश्लेषण के साथ बताया कि काँग्रेस के हाथ में इस करार के बहाने अस्पृश्यों के खिलापु प्राणघातक चीज मिली है। उन्होंने मांग की कि इस करार को खारिज कर दिया जाए।

फर्स्ट एण्ड सेंकड महार बटालियन का कैंप कमेटी में था। डॉ. बाबासाहेब से वहां के अफसर मिलने आए और उन्होंने बाबासाहेब को चाय का न्यौता दिया। बाबासाहेब कामठी गए और चायपार्टी के बाद उन्होंने सैनिकों को उद्देश्य कर भाषण दिया उन्होंने कहा कि महार और महाराष्ट्र की वीरता की उज्ज्वल परंपरा को हमेशा याद रखें और पुरुषार्थ के साथ लड़कर नाम और अधिकार कमाएं। दोनों बटालियन्स, उनके कमांडिंग अफसर और बाबासाहेब की इक्ट्ठे तस्वीर खिंचाई गईं।

फेडरेशन के संविधान का मराठी अनुवाद नई बस्ती, नागपुर के निवासी वकील श्री सखाराम मेश्राम ने किया। मध्यप्रांत वहाड शेड्यूल्ड कास्टम फेडरेशन के कार्यवाह नागपुर के श्री हरिदास आवले ने पुस्तक रूप में उसे 31.12.1942 को प्रकाशित किया। कीमती थी 4 आने और कुल पृष्ठ थे 15

हिंदुस्तान के राजनीतिक जीवन में दलितों को पृथक और स्वयंपूर्ण दर्जा दिलाकर उनकी संख्या, उनकी आवश्यकताएं, उनका महत्व आदि के कारण जो राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकार उन्हें मिलना अवश्यंभावी है वे उन्हें दिलाना अखिल भारतीय दलित फेडरेशन के उद्देश्य है। यह बात भाग (1) में व्यक्त की गई है। संविधान में कुल 23 हिस्से थे।

नागपुर परिषद में पारित प्रसताव की प्रतियां प्रांत के गवर्नर और वाइसराय के पास भेजी गईं।

नागपुर की परिषद पूरी होने के बाद बाबासाहेब मुंबई आए। दूसरे दिन उन्होंने यशवंत­ राव, मुकुंदराव, द्रौपदी और शंकर मामा को अपनी स्टडी में बुलाया। उन्होंने इनसे कहा