194 18/19.7.1942 जनतंत्र जीवित रहा तो उसके पफता जरूर मिलेंगे, लेकिन अगर जनतंत्र का खात्मा हुआ तो विनाश अटल है - नागपुर - Page 376

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कि मैं अब दिल्ली जा रहा हूं। आप सभी लोग ठीक से रहें और मेरा पुस्तकालय ठीक से सम्भाले। उनके लिए डॉ. बाबासाहेब कपड़े ले आए थे वे उन्होंने सबको दिए। फिर रमाबाई को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वह अब अगर होती तो उसे बहुत आनंद होता। मेरे लिए उन्होंने बहुत कष्ट झेले।’’ बोलते हुए उनकी आवाज भरीं आई थी। आंखों में आंसू तैर रहे थे। उनके आंसुओं ने सबको रुला दिया। ख्3,

अखिल भारतीय दलित वर्ग परिषद में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषणः

अध्यक्ष महाराज, भाइयों और बहनों,

इस परिषद में बोलते हुए सबसे पहले भाषा की अड़चन का मूलभूत सवाल सामने आ जाता है। इस विशाल जनसमुदाय में मराठी प्रदेश से आए लोगों की संख्या काफी बड़ी है। इसलिए इस परिषद की रिपोर्ट उन्हें समझ आए इसलिए भाषण मराठी भाषा में होना जरूरी है। लेकिन यहां मराठी भाषी श्रोताओं के अलावा गैर-मराठी प्रदेश से आए अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधि उपस्थित हैं। उनमें से कुछ बंगाल, बिहार, मद्रास, आंध्र, पंजाब तथा अन्य प्रांतों से आए हुए लोग भी हैं। जाहिर हैं कि मेरी बातें उन्हें भी समझ आएं इसलिए मुझे अंग्रेजी में बोलना होगा। इस मुश्किल से बचने के लिए मैंने तय किया है कि एक बार अंग्रेजी में और फिर मराठी में मैं बोलूंगा। सो, जो मैं कहना चाहता हूं वह दोनों भाषियों को समझ आए। आज मैं अंग्रेजी में बोलना चाहता हूं कल मराठी में बोलूंगा।

यह परिषद लेने की कल्पना सूझी कैसे इस बारे में दो शब्द बताना उचित होगा ऐसा मुझे लगता है। आपको याद होगा कि पिछले अप्रैल महीने में मुझे न्यौता मिला था कि मैं सर स्ट्राफर्ड क्रिप्स से मिलने के लिए दिल्ली में उपस्थित रहूं। वह अंग्रेजों के प्रतिनिधि की हैसियत से भारतीय संविधान में कुछ बदलावों को सुझाने के लिए आए थे। उनकी तरफ से दी जा रही सूचनाएं भारत के विभिन्न राजनीतिक पक्ष स्वीकारें इसलिए सभी राजनीतिक पक्षों के साथ बातचीत करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। दिल्ली जाने से पहले भारत विभिन्न प्रांतों की अनुसूचित जाति के प्रतिनिधियों को मैंने सोच-विचार के लिए मैंने दिल्ली बुलाया था। सर स्ट्राफर्ड क्रिप्स के साथ हुई बातचीत का निर्णय जब मैंने उन्हें बताया तब हम सबकी समझ में आ गया था कि सर स्ट्राफर्ड क्रिप्स जो योजनाएं ले आए थे वे अनुसूचित जातियों के कल्याण पर प्राणघातक हमला ही था। क्रिप्स की योजनाओं के बारे में अपना नजरिया मैंने एक लेख के जरिए अखबारों के जरिए जाहिर किया था। शायद आप लोगों ने भी वह पढ़ा हो। लेकिन मुझे लगता रहा कि अखिल भारतीय अनुसूचित जातियों की सबके साथ और सुसंगठित आंदोलन छेड़ना बेहद आवश्यक

3 डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्रः चां. भ. खैरमोडे, खंड 9वां, पृष्ठ 120 से 127