368 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जबर्दस्ती लादी गई। नए राजा के प्रति अपनी निष्ठा को व्यक्त करने के लिए उन्हें राजा की स्वास्थ्य-सेहत की बेहतरी के बारे में कामना व्यक्त करनी पड़ती थी। आज राजा के लिए स्वास्थ्य और आरोग्य की कामना करना अब आम बात है और इस प्रथा का स्रोत ढूंढने की किसी को जरूरत भी महसूस नहीं होती। जैसे कि मैंने अभी बताया, इस प्रथा की जड़ इस उद्देश्य में है कि जिनकी निष्ठा संदोहस्पद लगे वे अपनी राजनिष्ठा स्पष्ट रूप से सार्वज्निक करें। आपकी निष्ठा संदेहास्पद नहीं है इसका मुझे अहसास होने के कारण उसे फिर इसप्रकार मानपत्र के जरिए आप व्यक्त करें इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। अब आपका आग्रह है कि मैं यह मानपत्र स्वीकारूं। मेरे बारे में आपके मन में जो पे्रम और आदर है उन सद्भावनाओं के प्रतीक के रूप में मैं इस मानपत्र का स्वीकार करता हूं। दलित वर्ग के लिए मैंने जो कुछ किया है वह आपको मंजूर होने के प्रतीक स्वरूप मैं इस मानपत्र को मानता हूं। भारत के अस्पृश्य वर्ग का पक्ष उनकी ओर से भारतीय राजनीति में रखने की मैंने जो नीति अपनाई है उसे आप लोगों का समर्थन है यह बात इस मानपत्र से प्रमाणित होती है। इस देश का शासन चलाने में हमें हिंदु-मुसलमानों की बराबरी वाली सम्मानीय भागीदारी प्राप्त करना हमारा लक्ष्य है। मैं आपको आश्वासन देता हूं कि हमने जो लक्ष्य तय किया है उसे प्राप्त करने के लिए मैं पूरी निष्ठा के साथ कोशिश करूंगा। ‘लक्ष्य प्राप्ति के लिए कोशिश करूंगा’ इस आशय वाले मेरे आश्वासन की आपको कम ही जरूरत है। असल बात तो यह है कि इस विषय में मुझे आपसे आश्वासन की जरूरत है। आपने मेरे बारे में प्रेम और आदर व्यक्त किया है लेकिन उसकी आवश्यकता नहीं थी। मुझे आपसे और तरह का आश्वासन चाहिए। शक्ति, एकता और अपने हकों के लिए आवाज उठाने का, अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए लड़ने का और अपने अधिकार प्राप्त होने तक कभी भी हार न मानने का वचन मुझे आपसे चाहिए। अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए आपको वचनबद्ध होना पड़ेगा। मैं अपने कर्त्तव्यों के प्रति वचनबद्ध हूं। न्याय जब हमारे पक्ष में हो तो इस लड़ाई में हमारी हार की कोई वजह मुझे दिखाई नहीं देती। मेरे जीवन का विशेष आनंददायी पर्व है यह संग्राम, मेरे लिए यह संग्राम पूरी तरह से आध्यात्मिक है। इसमें भौतिक अथवा नीच कुछ भी नहीं। क्योंकि सत्ता या संपत्ति के लिए यह संग्राम नहीं है। यह संग्राम है स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए। यह संग्राम मानवी व्यक्तित्व के विकास के लिए है। हिंदू समाज व्यवस्था के कारण जिस मानवी व्यक्तित्व को मसल दिया गया ओर छिन्नविच्छिन कर दिया गया उस व्यवस्था के खिलाफ यह संग्राम है और इस संग्राम में अगर हम हारे तो हमेशा के लिए मसल दिए जाएंगे। और यह दमन हमेशा चलता रहेगा। आपके हित के लिए आखिर मैं यही उपदेश दूंगा-पढ़ो, आंदोलन करो, लड़ाई छेड़ो, संगठित बनो, आत्मविश्वास रखा और कभी भी धीरज नहीं खोना। मुझे अहसास है कि आप मेरा साथ देंगे और मैं भी हमेशा आपका साथ निभाऊंगा।