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* ब्राह्मणवाद पर प्राणघातक वार

दिनांक 18 और 19 जुलाई, 1942 को नागपुर में आयोजित अखिल भारतीय दलित वर्ग परिषद में समापन का भाषण करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा-

मित्रों,

पिछले दस वर्षों में राजनीतिक आंदोलन तेज गति से चल रहे हैं। हालांकि, अस्पृश्यों के संदर्भ में कहें तो आपने आज जो प्रस्ताव पारित किए हैं उनके कारण मुझे यकीन है कि अस्पृश्यों के जीवन में एक नए युग की शुरूआत हुई है। आप जानते हैं कि मैं कल से अपने नए दफतर की जिम्मेदारी स्वीकारने जा रहा हूं। इसीलिए पिछले बीस सालों के अपने मुखिया होने का हिसाब आपके सामने पेश किया है।

मुसलमान और अस्पृश्यों को भले अल्पसंख्यक माना गया हो, लेकिन उनकी स्थितियों में बहुत अंतर है जिसे साफ तौर पर बताया जाना चाहिए। हमारी जाति की तुलना में मुसलमान जाति बहुत अमीर है। अंग्रेजों के आने तक वे इस देश के शासक थे। इस प्रकार उनके साथ ऊंचा दर्जा जुड़ा हुआ है। हमारी तुलना में उनकी कई गुना प्रगति हुई है। सैंकड़ों सालों से हमारा शोषण होता रहा है। हमारी आर्थिक स्थिति आत्यंतिक दरिद्र है। केवल जनसंख्या के सहारे हम अपनी तुलना मुसलमानों के साथ नहीं कर सकते। शुरू से हमें पूरी तरह अपने आप पर निर्भर रहते हुए काम करना होगा। हमें अपनी जाति का उद्धार करना है। मेरी इस नई नियुक्ति के कारण अपनी जिम्मेदारी मुझे किसी और को सौंपनी पड़ रही है। अधिकार पाने का मुझे कोई चाव नहीं हे। मैं इसके बगैर भी ठीक था। केवल डॉ. अम्बेडकर औरः सांसद डॉ. अम्बेडकर में कुछ फर्क है ऐसा मुझे नहीं लगता। मेरी नियुक्ति के बारे में अधिक महत्वपूर्ण एक बात जो मुझे लगती है वह यह है कि गवर्नर जनरल के एक्टजीक्यूटिव काउंसिल में दलित प्रतिनिधि के लिए एक जगह रखनी ही चाहिए ऐसा अब तय हो चुका है। ब्राह्मणवाद के लिए यह प्राणघातक मुक्का है। मेरी नियुक्ति का यहां महत्व है। इस तरह का चलन ब्राह्मणवाद के लिए बिल्कुल हितकारी नहीं। मुझे लगता है कि यह अस्पृश्यों की बहुत बड़ी विजय है।

कई लोग हैं जिनकी मेरे बारे में अच्छी राय नहीं है। पढ़ने में समय व्यतीत करते हुए अकेले जीवन बिताना मेरा स्वभाव है। मेरे स्वभाव के बारे में कई लोगों को लगता

* डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकरांची भाषणेः संपादक- मा. फ. गांजरे, खंड 1, पुनर्मुद्रण 1986, पृष्ठ 92-94