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की है वह किसी भी तरह के फंड के बगैर की है। हालांकि अपना संगठन बनाने के लिए फंड इक्ट्ठा करना अत्यंत आवश्यक है यह मैंने आपको बताया हुआ है। फंड के बगैर आगे बढ़ने में हमारा समाज असमर्थ रहेगा और पहले से सुसंगठित जाति के साथ चलने में उसे कठिनाई महसूस होगी।
सार्वजनिक जीवन में गलतियां तो होती ही हैं लेकिन हमें उन गलतियों से नाउम्मीद नहीं होना चाहिए। गलतियों के जरिए ही हमें अपने दोषों का पता चलता है और पता चलने के बाद ही हम उनसे छुटकारा पा सकते हैं।
समूचे भारत में हमारा एक संगठन होना चाहिए यह आपने जो प्रस्ताव पारित किया है उसे देख कर मुझे बेहद प्रसन्नता है। हर प्रांत में अब अपनी शाखाएं खोल लीजिए। फिलहाल जो संगठन अस्तित्व में हैं वे सब इस संगठन में विलीन हों इस ओर आप विशेष ध्यान दें।
कार्यालय तथा आंदोलन के केन्द्र के तौर पर न केवल हर प्रांत में बल्कि हर शहर में अपने संगठन की एक इमारत हो यह मेरी बड़ी इच्छा है। कल रात वेले के दशरथ पाटील के साथ में बातचीत कर रहा था। नागपुर में जमीन का कोई टुकड़ा खरीद कर हमारी संस्था के लिए एक इमारत खड़ी करने के लिए मैंने उनसे कहा है। बीस से पच् चीस हजार रुपयों में यह काम हो सकता है। ऐसी इमारत नागपुर में बनवाने की तैयारी अगर आप करें और नींव का पत्थर रखने के लिए अगर बुलाएं तो उस निमंत्रण को स्वीकार करने में मुझे बड़ी खुशी होगी।