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370 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

है कि मैं लोगों के साथ ठीक से पेश नहीं आता और उन्हें टालता हूं। मेरा बर्ताव इस बात का सबूत है। मैं यकीनी तौर पर आपको बताना चाहता हूं कि किसी का भी किसी भी तरह का आपमान करना मेरा उद्देश्य नहीं होता। मेरा जीवन बेहद सीमित है। मैं बहुत-कुछ करना चाहता हूं लेकिन मेरी मदद के लिए कोई नहीं है।

बहुत से हिंदू लोग मेरी तरफ दुश्मनी की नजर से देखते हैं। कहते हैं कि उनकी भावनाएं आहत हों इस कदर में कठोरता से बोलता हूं। लेकिन मैं जानता हूं कि मेरा हृदय अत्यंत कोमल है। मेरे कई मित्र ब्राह्मण हैं। हालांकि मैं मानता हूं कि कोमल हृदय के इंसान को भी सत्य कह ही देना चाहिए। अपने भी बंधु-बांधवों के साथ कुत्तों से भी अधिक बुरा व्यवहार किया जा रहा है और उनकी उन्नति के सभी द्वार बंद हो चुके हैं यह देखते हुए भी हिंदुओं के साथ मेरे दयालु व्यवहार करने की उम्मीद केसे की जाती है? मैं जानता हूं कि हिंदुओं की वर्तमान पीढी़ ने कुछ नहीं किया है। इसीलिए अपनी भावनाओं को काबू में रखते हुए मैं अपने दुश्मनों से सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की कोशिश करता हूं। विरोधकों के साथ मैं कभी दुष्टता से पेश नहीं आता। लेकिन उन्हें उनका अपराधभाव कोंचता रहता है।

मेरी पक्की राय है कि इस दिशा में हिंदू, मुसलमान और दलितों के बीच राजनीतिक अधिकारों का समान रूप से बंटवारा होना चाहिए। हिंदू और मुसलमानों के साथ दलित वर्ग को भी प्रशासन में समान अधिकार मिलने चाहिए। इन तीन खंभों के सहारे ही भविष्यकालीन संविधान सही तरीके से कार्य कर पाएगा। यह स्थिति प्राप्त करने के लिए आप सभी को एक झंडे के नीचे इक्ट्ठा होना पड़ेगा। एक ही संगठन बनाना पड़ेगा। अब तक जो अधिकार हमारे हिस्से आए हैं वे संविधान के जरिए हमें नहीं मिले हैं इसकी इकलौती वजह है कि हम अभी तक संगठित नहीं हुए हैं। आप सभी जब संगठित होंगे और एक ही संस्था के तहत काम करने लगेंगे तब आप अपने अधिकारों को प्राप्त कर लेंगे। मुझे इस बारे में कोई संदेह नहीं।

काँग्रेस एक बहुत बड़ा संगठन है। उसका प्रभाव दूर-दूर तक फैला हुआ है। कोई भी यही बात बड़ी सहजता से पूछते हैं कि आपके संगठन का प्रचार दूर तक क्यों नहीं हुआ है? काँग्रेस के पास दो सुविधाएं हैं जो हमारे पास नहीं हैं। भारत के सभी छापाखाने काँग्रेस के पीछे खड़े हैं। सो उसे पूरी प्रसिद्धि प्राप्त होती है। हमें तथाकथित राष्ट्रीय हिंदू अखबारों में प्रसिद्धि नहीं मिलती। दूसरी बात यह कि, काँग्रेस के पास पैसा है। आपको याद होगा कि काँग्रेस द्वारा एक करोड़ रुपयों का फंड इक्ट्ठा किया गया है। उसकी सफलता का राज इस प्रचंड फंड में छिपा है। लेकिन अपनी जाति के कार्य के लिए मैंने कभी भी फंड की मांग नहीं की है जो संगठन और उन्नति हम लोगों ने