198 20.7.1942 राजनीतिक समता के लिए जरूरी है स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार - नागपुर - Page 394

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* राजनीतिक समता के लिए जरूरी हैं स्वतंत्र राजनीतिक अधिकार

20 जुलाई, 1942 को नागपुर में समता सैनिक दल को उद्देश्य कर डॉ. बाबासहेब अम्बेडकर ने कहा-

मध्य प्रदेश में खड़ा किया गया स्वयंसेवकों का यह विस्तृत दल देख कर मुझे बहुत

खुशी हो रही है। सबसे पहले स्वयं सेवकों का यह विस्तृत दल 1926 में मुंबई में शुरू किया गया था। हमारे सामान्य आंदोलन का ‘समता सैनिक दल’ का विभाग है। हमारे आंदोलन का सचमुच यह एक मजबूत साधन है। अब हमारे आंदोलन के लक्ष्य और नीतियों में पूरी तरह और मौलिक बदलाव हुआ है। एक समय ऐसा था जब हमारा उद्देश्य था कि हमें हिंदू समाज के साथ जुड़े घटक होने के कारण हिंदू समाज में समता का स्थान प्राप्त हो, उसे प्राप्त करना ही हमारा लक्ष्य था। आज हालात बदल चुके हैं। आज हम हिंदुस्तान के राजनीतिक जीवन में अलग और स्वतंत्र घटक हैं और हम सोचते हैं कि हमारा स्थान हिंदुओं की बराबरी का है। इस प्रकार हमारे आंदोलन के लक्ष्य और नीतियों के साथ-साथ समता सैनिक दल के लक्ष्य और नीतियों में भी बदलाव आया है। हिंदू समाज में समता प्राप्त करने के लिए दलित वर्ग की मांगों को प्रोत्साहन देना ही इस स्वंयसेवकों के संगठन निर्माण का मूलभूत उद्देश्य रहा है। जैसे कि नाम से ही सूचित होता है- दलित वर्ग को हिंदू समाज में समता का स्थान प्राप्त कराने के लिए ही इस दल की स्थापना की गई थी। आज वह हिंदुओं से पूरी तरह अलग हो चुकी और हिंदुओं की बराबरी में सामाजिक सत्ता हासिल करना उसका लक्ष्य है। हमें उम्मीद है कि धर्मांतरण के जरिए इस लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। हमें कदम-कदम काम आगे बढ़ते जाना होगा। पृथक राजनीतिक अधिकारों की मांग कर पहले हमें राजनीतिक समता की मांग करनी पड़ेगी। इसी राह से हमें अपनी कोशिशों की पहल करनी होगी। यह बड़ा मुश्किल काम बन बैठा था क्योंकि हमारी राजनीतिक मांगों को व्यक्त करने के लिए दलित वर्ग को सुरक्षित सभास्थान मिल नहीं रहा था। एक समय ऐसा था कि यह नामुकिन था। काँग्रेस का संगठन इतना उदंड हो गया था कि मुंबई में वह किसी अन्य राजनीतिक दल को सभा आयोजित करने नहीं दे रही थी। कोई सभा आयोजित करने का साहस ही नहीं कर पाते थे क्योंकि काँग्रेस के स्वयंसेवक आकर ऐसी सभाएं ध्वस्त, तहस-नहस कर देते थे। इस दशहत का सामना करने के लिए हमने हमारे स्वयंसेवकों

* डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के भाषणः संपादक- मा. फ. गांजरे, खंड 1 पुनर्मुद्रित 1986, पृष्ठ 95-98