456 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जिन मूलभूत सिद्धांतों पर विधिमंडल के सीटों का विभाजन आधारित है उसे मैं यहां निवेदन कर रहा हूं-
(1) राज्य का ज्यादातर कामकाज तत्वतः ग्राह्म नहीं है और व्यवहार्यतः अन्यायकारी है। बहुसंख्य समुदायों को प्रतिनिधित्व के लिए सापेक्ष बहुसंख्यत्व दिया जा सकता है। लेकिन पूरी तरह बहुसंख्यकत्व के आधार पर बहुत अधिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा सकता।
(2) विधिमंडल में जिस बहुसंख्य समुदाय को सापेक्ष बहुमत प्राप्त है, प्रतिनिधित्व के नजरिए से उसके पास किसी छोटें अल्पसंख्यक समुदाय की सहायता से राज्य का कामकाज चला सके इतनी अधिक सीटें न हों।
(3) बहुसंख्यक समुदाय और कोई भी अन्य एक प्रतिष प्राप्त अल्पसंख्यक समुदाय की एकजुटता से बहुमत न बन सके, जिससे कि अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के हितसंबंधों को लेकर इंद्रचाल- बने इस प्रकार सीटों का विभाजन किया जाना चाहिए।
(4) बहुसंख्यकों पर निर्भर न करना पड़े और अल्पसंख्य समुदाय अगर एकजुट हो जाएं तो अपनी सरकार स्थापन कर सकें इस प्रकार सीटों का बंटवारा किया जाना चाहिए।
(5) बहुसंख्यक समुदायों से जो अतिरिक्त सीटें वापिस ली जाएं उन्हें अल्पसंख्यक समुदायों में विपरीत अनुपात में बांटना चाहिए। यानी, जो अल्पसंख्यक समुदाय अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से बड़ा है तथा सामाजिक, आर्थिक और षिक्षा के क्षेत्र में अन्य अल्पसंख्यकों की तुलना में जिसने अधिक उन्नति हासिल की है उसे कम सीटें दी जाएं। इसके विपरीत, जो अल्पसंख्यक समुदाय जनसंख्या की तुलना में बहुत छोटी है और शैक्षिक, आर्थिक और षिक्षा के क्षेत्र में औरों की तुलना में पीछे है उसे ज्यादा सीटें दी जाएं।
मेरी राय में प्रतिनिधित्व में संतुलन होना जरूरी है। केवल जनसंख्या के बल पर किसी समुदाय को अन्य समुदाय पर हावी होने के लिए इस प्रतिनिधित्व में कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी गई है। हिंदू बहुसंख्यकता को मुसलमानों से विरोध और मुस्लिम बहुसंख्यकता को हिंदु और सिक्खों का विरोध-इन बातों को केन्द्रीय और प्रांतीय विधिमंडल में जगह नहीं दी गई है।
मतदान का स्वरूप
मतदान के बारे में निम्नांकित बातों का स्वीकार किया जाना जरूरी है-
(1) संयुक्त चुनाव-क्षेत्र या पृथक चुनाव-क्षेत्र कार्य तत्व नहीं बल्कि अत्यावश्यक कार्य को पूरा करने को साधन है।
(2) अल्पसंख्यक समुदायों के नामधारी प्रतिनिधियों को विधिमंडल में स्थान नहीं मिलना चाहिए, वे अपने असली प्रतिनिधियों को विधिमंडल में भेज पाएं।