512 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए फेडरेशन को अपूर्व विजय
दिलाएं
27 दिसंबर, 1945 के दिन कोइंबतुर के बच्चे-बुढ़े सब डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में स्टेशन पर इकट्ठा हुए थे। डॉ. बाबासाहेब जैसे ही स्टेशन से बाहर निकले ‘जय भीम’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। इन नारों ने अस्पृश्येतरों को यकीन दिला दिया कि दक्षिण हिंदुस्तान में भी लोग डॉ. बाबासाहेब के दर्शन के लिए हमेशा उत्सुक होते हैं। शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन की स्थानीय शाखा की ओर से आयोजित इस सभा में अस्पृश्यों के अपार जनसमुदाय के सामने भाषण देते हुए डॉ. बाबासाहेब ने कहा,
‘‘आगामी चुनावों में जो जीत कर आएंगे वे हिंदुस्तान का संविधान बनाने वाले हैं, इसलिए ये चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन चुनावों में मुख्य रूप से दो ही पार्टियों के बीच झगड़ा है- शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन और काँग्रेस के बीच। आप सबको एक बात ध्यान में रखनी होगी कि ब्राह्मणेतर पार्टी यहां टूट-फूट गई है इसलिए काँग्रेस से ही हमारा जबरदस्त विरोध होगा। 1937 में ब्राह्मणों ने अपनी वर्चस्विता स्थापित कर मंत्रिमंडल पर कब्जा किया।’’
ब्राह्मण-ब्राह्मणेतर पक्षों के बारे में बोलते हुए उन्होंने श्री राजगोपालाचारी और श्री कामराज नाडर के बीच चल रहे विवाद की ओर निर्देश किया। उन्होंने कहा कि, काँग्रेस को चुनावों में बहुमत मिला और राजगोपालाचारी को मंत्रिमडल बनाने का अधिकार प्राप्त हुआ तो श्री नाडर को वे जेल की हवाखाने भेजेंगे। आगे बोलते हुए डॉ. बाबासाहेब ने कहा ‘हमें (अस्पृश्यों को) क्या चाहिए? हमें विधिमंडल में और अधिकारियों की जगहों में निश्चित अनुपात में प्रतिनिधित्व चाहिए। शिक्षा के लिए पैसा चाहिए। औरखेती के लिए जरूरत के मुताबिक जमीन चाहिए। अस्पृश्यों के भविष्य की चिंता को दूर करने के लिए न बातों की जरूरत है। ये बातें हासिल करने के लिए राजनीतिक अधिकार पाना जरूरी है। इसीलिए मैं आपसे कहता हूं कि आप सब इन चुनावों में अपने फेडरेशन के उम्मीदवारों को ही जिता दें। आप सब लोगों को यह निश्चय करना होगा कि अब के बाद हम किसी की वर्चस्विता अपने पर लादेंगे नहीं। हम पर कोई शासन न चलाए। हमखुद शासनकर्त्ता बनेंगे और इसी प्रण के साथ बरत कर अपने फेडरेशन को अपूर्म विजय दिलाएंगे तो हम जल्द ही अपना लक्ष्य हासिल करेंगे।