122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय
मुस्लिम 687 5.80 100 2.04
पारसी 1526 12.87 965 19.66
आदिम जातियां और
पर्वतीय आदिवासी 6 .05 - -
अन्य 103 .07 92 .86
(यहूदियों आदि सहित)
| d | k | fy | t |
|---|
188 - 82 188
82
कालिजों में छात्र संख्या छात्रों की कुल संख्या
का प्रतिशत
ईसाई 14 3
ब्राह्मण 241 50
कृषक 5 1
अन्य हिन्दू छोटी जातियां 0 0
अन्य जातियां 103 21.3
मुस्लिम 7 1.5
पारसी 108 21.5
आदिम जातियां और
पर्वतीय आदिवासी 0 0
अन्य 2 .04
(यहूदियों आदि सहित)
ये आंकड़े क्या दर्शाते हैं? इनसे पता चलता है कि हालांकि सरकार की नीति जन-शिक्षा की थी, परन्तु आम आदमी के लिए शिक्षा उतनी ही दुर्लभ थी, जितनी 1854 से पहले थी और हिन्दुओं की निम्नतम तथा आदिम जातियां अभी भी शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक पिछड़ी थीं। यहां तक कि 188 - 82 में भी इस प्रेसिडेंसी में इन समुदायों का एक भी छात्र कालिजों अथवा हाई स्कूलों में नहीं पढ़ता था। दलित जातियों को शिक्षा के मामले में अन्य जातियों के स्तर तक लाने में विफल होने का क्या कारण हो सकता है? इस प्रश्न के उत्तर के लिए हमें फिर इस प्रेसिडेंसी में सरकार की शिक्षा नीति के इतिहास को देखना होगा।
1854 के कोर्ट ऑफ डायेरक्टर्स के पत्र में 40 साल बाद पहली बार यह स्वीकार किया गया कि सरकार का कर्तव्य है कि भारत के जन - जन तक शिक्षा का प्रसार