ख. दलित जातियों की शिक्षा - Page 151

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

करें। सहयोजन के सिद्धान्त में सदा गलत व्यक्ति के सहयोजन का खतरा रहता है। हाल ही में स्कूल बोर्ड के चुनावों में पूर्वी खानदेश के दलित वर्गों को इस खतरे का सामना करना पड़ा। लेकिन यदि सही व्यक्ति को सहयोजित कर लिया जाता है तो 15 सदस्यों की विरोधी टोली में, जो स्कूल बोर्ड की अधिकतम संख्या है, एक अकेला व्यक्ति क्या कर सकता है।

  1. यदि सरकार दलित जातियों के बीच शिक्षा का प्रसार सच्चे मन से करना चाहती है, तो कुछ ऐसे उपाय हैं जो सरकार को करने ही चाहिएं। सभा का अपना विश्वास है कि सरकार को इस संबंध में क्या करना चाहिए और उन्हें क्रमवार प्रस्तुत करना चाहती है :

  2. जब तक अनिवार्य शिक्षा अधिनियम को रद्द नहीं किया जाता और स्कूल

बोर्डों को प्राथमिक शिक्षा का हस्तांतरण बंद नहीं किया जाता तब तक सभा

को आशंका है कि दलित वर्गों की शिक्षा के हित को भारी आघात लगता

रहेगा।

  1. जब तक प्राथमिक शिक्षा की अनिर्वायता को बाध्यकारी नहीं बनाया जाता और

जब तक प्राथमिक स्कूलों में दाखिले के नियम का कठोरता से पालन नहीं

किया जाता, तब तक पिछड़ी जातियों की शैक्षिक प्रगति के लिए आवश्यक

परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होंगी।

  1. जब तक हंटर आयोग द्वारा मुसलमानों की शिक्षा के बारे में की गई सिफारिशों

को दलित जातियों की शैक्षिक प्रगति के लिए भी लागू नहीं किया जाता तब

तक उनकी प्रगति अधूरी ही रहेगी।

  1. जब तक दलित जातियों को सरकारी नौकरियों में नहीं लिया जाता, तब तक

उनका शिक्षा के प्रति अनुराग नहीं बढ़ेगा।

  1. सभा प्रेसिडेंसी में सुधारों के अनुसार दलित जातियों की शिक्षा के संबंध में ये टिप्पणियां करते हुए यह भूलना नहीं चाहती कि दलित जातियों की शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनके अनुसार कुछ छात्रावास खोले गए हैं और उच्च शिक्षा के लिए कुछ छात्रवृत्तियां भी दी गई हैं। परन्तु सभा यह कहना चाहती है कि जब तक प्राथमिक शिक्षा के प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए कदम नहीं उठाए जाते, तब तक दलित जातियों की उच्च शिक्षा के लिए प्रावधान करना व्यर्थ होगा। साथ ही यह भी भरोसा नहीं कि ये रियायतें जारी भी रहेंगी। दूसरी ओर वे शिक्षा के प्रभारी मंत्री की विशेष नीति पर और विधायी परिषद् में दलित जातियों की मतदान क्षमता पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं। ये दोनों अस्थिर आधार हैं और उन पर निर्भर नहीं किया जा सकता।