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दलित जातियों के हितों की रक्षा

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रिपोर्ट देने के लिए नियुक्त की गई मुडीमैन कमेटी का भी यही विचार था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट के पैरा 64 में स्वीकार किया कि दलितों को दिया गया प्रतिनिधित्व अपर्याप्त है।

  1. दलित जातियों को अनिवार्यतः दिए जाने वाले प्रतिनिधित्व की मात्रा : दलित जातियों को कितना प्रतिनिधित्व दिया जाए, जिसे पर्याप्त कहा जा सके? सभा के विचार में यह मानते हुए कि सिंध प्रेसिडेंसी से अलग हो जाएगा, बंबई विधान परिषद् के गठन की निम्नलिखित योजना के बारे में ऐसा सोचा भी जा सकता है कि उससे पर्याप्त प्रतिनिधित्व की दलित जातियों की मांग पूरी हो जाएगी।
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बंबई विधान परिषद् का गठन

सिंध के बिना बंबई प्रेसिडेंसी के लिए

निर्वाचन-क्षेत्र कुल सीटें दलित जातियों मुसलमानों मराठों

के लिए के लिए और संबद्ध

आरक्षित आरक्षित जातियों

के लिए

आरक्षित

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(क) शहरी

  1. बंबई शहर उ. 5 1 1
  2. बंबई शहर द. 3 - -
  3. अहमदाबाद शहर 3 1 1
  4. सूरत शहर 1 - -
  5. शोलापुर शहर 3 1 1
  6. पूना शहर 1 - - (ख) ग्रामीण

उत्तरी क्षेत्र

  1. अहमदाबाद जिला 5 1 1
  2. भड़ौच जिला 4 1 1
  3. कैरा जिला 5 1 1
  4. पंचमहाल जिला 4 1 1
  5. सूरत जिला 5 1 1
  6. थाणा जिला 5 1 1