क. बंबई प्रेसिडेंसी की सरकार के गठन से संबंधित - Page 21

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाङ्मय

आमुख

मुझे खेद है कि समिति के मेरे साथियों ने जो रिपोर्ट तैयार की है, न तो मैं उसके असली प्रयोजन से सहमत हो सका और न ही मैं अपनी जांच के दायरे में आने वाले अपेक्षतः अधिक महत्वपूर्ण निष्कषों को स्वीकार कर सका। इसलिए मैंने अपनी अलग रिपोर्ट प्रस्तुत की है। उसमें मेरे अपने विचार और सिफारिशें हैं। मेरी रिपोर्ट का कलेवर मेरे साथियों की रिपोर्ट से बड़ा हो गया है। इसमें केवल उठाए गए प्रश्नों के औपचारिक उत्तर शामिल करके इसके कलेवर को सीमित रखना शायद संभव होता। लेकिन मुझे लगा कि जिन सिद्धांतों पर प्रश्नों के उत्तर निर्भर हैं, उनके कतिपय सामान्य विवेचन के बिना न तो उत्तर दिया जा सकता है और न ही रिपोर्ट को भली प्रकार समझा जा सकता है। चूंकि रिपोर्ट संक्षिप्त होने से यह कहा जा सकता था कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के समर्थन में पर्याप्त तर्क और कारण नहीं दिए गए हैं, अतः मैंने संक्षिप्तता का विचार पूर्णतः छोड़ दिया और रिपोर्ट का कलेवर इतना बढ़ गया।