98 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
होते हैं। शिकार और मच्छीमारी के लिए जरूरी आज्ञापत्र पाने के लिए राज्य का निवासी न होने की स्थिति में राज्य के निवासी व्यक्ति से अधिक शुल्क उससे लेने का चलन है। राज्य के महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों के प्रवेश के लिए राज्य के निवासी न होने वालों से अधिक शुल्क लिया जाता है। और आपातकाल को छोड दें तो अन्य समय केवल राज्य के नागरिकों को ही अस्पताल और अनाथालयों में प्रवेश दिया जाता है।
संक्षेप में कहना हो तो, ऐसे अनेक अधिकार हैं जो राज्य सरकार केवल अपने नागरिकों और निवासियों को ही देती है। अनिवासियों के लिए उनको पाने की कानूनी तरीके से मनाही होती है। या फिर अनिवासियों के लिए निवासियों से अधिक कठिन शर्तों पर वे बहाल किए जाते हैं। अपने राज्य के नागरिकों को मिलने वाली इन सुविधाओं के कारण राज्य के नागरिक महत्वपूर्ण प्राप्त होता है। इन सभी बातों पर सूक्ष्मता से गौर करने पर पता चलता है कि नागरिकों और अनिवासियों को मिलने वाले अधिकारों में बहुत फर्क होता है। कारण विशेष से होने वाली या अल्पकालिक रिहाइशी में हर जगह कुछ विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तावित भारतीय संविधान में दोहरी राज्यप्रणाली के साथ-साथ एक नागरिकता है। पूरे भारत में एक ही नागरीकता है - भारतीय नागरिकता। वह राज्य की नागरिकता नहीं। किसी भी राज्य का निवासी होने के बावजूद हर भारतीय को देश का नागरिक होने के नाते समान अधिकार हैं। प्रस्तावित भारतीय संविधान की दोहरी राज्य प्रणाली अमेरिका की दोहरी राज्य प्रणाली एक और मामले में अलग है। अमेरिका में केंद्र और घटक राज्यों का संविधान में आंशिक संबंध है। अमेरिका के केंद्र और राज्य सरकार के संबंधों का वर्णन करते हुए ब्राईस (Bryce) कहते हैं .
‘‘केंद्र अथवा राष्ट्रीय सरकार और राज्य सरकारों की तुलना एक ही भूमि पर खडी बड़ी इमारत और छोटी इमारतों के समूह के साथ की जा सकती है। लेकिन वे मूलतः एक-दूसरे से भिन्न हैं।’’
अमेरिका की केंद्र और राज्य सरकारें परस्पर भिन्न हैं। लेकिन कितनी भिन्न हैं? इस भिन्नता की कुछ हद तक पहचान निम्नलिखित वास्तविक स्थितियों से होती है -
- प्रशासन का जनतांत्रिक स्वरूप कायम रखते हुए हर राज्य को अपना संविधान
बनाने की इजाजत है।
- राष्ट्रीय सरकार पर निर्भर न रहते हुए राज्य के लोगों ने अपने संविधान में संशोधन/
परिवर्तन करने का अधिकार हमेशा के लिए अपने पास रखा है।
ब्राइस के ही शब्दों में अगर कहना हो तो- ‘‘अमेरिका के राज्य के राष्ट्रसंघ का यह स्वरूप राज्य के अपने संविधान में किए गए प्रबंधों पर आधारित है। राज्य की सत्ता,